तेजस्वी का हमला: “भाजपा राज में ‘बिहारी’ होना बना अपराध, दिल्ली पुलिस ने पहचान देखकर मारी गोली”

File Photo: Tejashwi Yadav

दिल्ली में बिहार के एक युवक की हत्या ने पूरे देश की राजनीति को गर्मा दिया है। खगड़िया के पांडव कुमार की मौत अब एक सियासी संग्राम बन चुकी है। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर सीधे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर निशाना साधा है। तेजस्वी का आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों और दिल्ली पुलिस की नजर में ‘बिहारी होना’ ही सबसे बड़ा गुनाह बन गया है।

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा और कड़ा संदेश साझा किया है। उन्होंने लिखा— ‘भाजपा सरकार में बिहारी होना ही सबसे बड़ा अपराध और देशद्रोह हो गया है।’ तेजस्वी ने दावा किया कि पांडव की हत्या सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि वह बिहारी था। उन्होंने भाजपा को घेरते हुए कहा कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां पार्षद से लेकर सांसद, उपराज्यपाल और गृहमंत्री तक सब भाजपा के हैं, फिर भी एक बिहारी सुरक्षित नहीं है। तेजस्वी ने कड़े शब्दों में कहा कि ‘भाजपा अब बिहारियों के लिए काल बन चुकी है’।

तेजस्वी यादव ने इस घटना के लिए बिहार की पिछले 21 वर्षों की नीतीश-भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि खराब नीतियों के कारण बिहार के युवाओं को मजबूरन पलायन करना पड़ता है। तेजस्वी के मुताबिक, दूसरे राज्यों की भाजपा सरकारें और प्रशासन बिहारियों को सम्मान के बजाय शक, नफरत और हीनभावना की नजर से देखते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली जिस दिल्ली पुलिस पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उसने ‘बिहारी होने’ मात्र से पांडव को अपराधी मानकर गोली कैसे मार दी?

नेता प्रतिपक्ष ने एनडीए नेताओं को ‘बड़बोला’ बताते हुए उन्हें ‘बिल में छिपा’ हुआ करार दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए पूछा— ‘क्या इन भाजपाइयों में हिम्मत है कि उस हत्यारे पुलिसकर्मी को सजा दिलवा सकें?’ तेजस्वी ने सरकार के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं: मामले की गहनता से जांच हो, हत्यारे को कड़ी सजा मिले और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने साफ कहा कि यह घटना बिहारवासियों के सम्मान पर आघात है और उन्हें न्याय ‘अभी और अविलंब’ चाहिए।

तेजस्वी यादव के इस बयान ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर दबाव बहुत बढ़ा दिया है। खगड़िया के पांडव और उसके दोस्त कृष्ण के साथ जो हुआ, उसने एक बार फिर प्रवासी बिहारियों की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। क्या अब ‘डबल इंजन’ की सरकार इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करेगी या यह सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगा?

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