दिल्ली में बिहारी युवक की हत्या मामले में पीड़ित परिवार से मिले सांसद पप्पू यादव, दिल्ली पुलिस पर लगाया ‘क्षेत्रीय घृणा’ और अहंकार का आरोप

सांसद पप्पू यादव ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात

देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवता और क्षेत्रीय पहचान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खगड़िया के 21 वर्षीय युवक पाण्डव कुमार की दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल ने कथित तौर पर सिर्फ इसलिए हत्या कर दी क्योंकि वह ‘बिहारी’ था। इस नृशंस हत्याकांड के बाद पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने पीड़ित परिवार के घर पहुँचकर हुंकार भरी है। पप्पू यादव ने सीधे तौर पर केंद्र और दिल्ली पुलिस को कठघरे में खड़ा करते हुए इसे ‘क्षेत्रीय घृणा’ का परिणाम बताया है।

घटना रविवार तड़के करीब 2:30 बजे की है। खगड़िया का रहने वाला पाण्डव कुमार, जो दिल्ली में फूड डिलीवरी का काम करता था, अपने दोस्त के बच्चे के जन्मदिन से लौट रहा था। चश्मदीदों और सांसद पप्पू यादव द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ (Special Cell) में तैनात हेड कांस्टेबल नीरज कुमार ने उन्हें रोका और बिहारी कहकर अपमानजनक गालियां दीं। आरोप है कि नशे में धुत कांस्टेबल ने क्षेत्रीय पहचान को लेकर घृणा व्यक्त की और अपनी सर्विस पिस्तौल से पाण्डव के सीने में गोली मार दी। गोली पाण्डव के शरीर को चीरती हुई उसके पीछे बैठे दोस्त कृष्ण को भी जा लगी। पाण्डव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कृष्ण अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।

सांसद पप्पू यादव ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और इस घटना को ‘सत्ता के अहंकार और वर्दी की आड़ में कत्लेआम’ करार दिया। उन्होंने कड़े लहजे में पूछा कि आखिर भाजपा शासित राज्यों में बिहार के युवाओं को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? पप्पू यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी तंज कसते हुए कहा कि वे अपने राज्य के युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं। सांसद ने आरोप लगाया कि अगर वर्दीधारी ही रक्षक के बजाय भक्षक बन जाए, तो आम आदमी कहाँ जाएगा?

पप्पू यादव ने सरकार और प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली—आरोपी कांस्टेबल नीरज कुमार के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर उसे फांसी की सजा दी जाए। दूसरी—इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो ताकि यह साफ हो सके कि इसके पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं थी। और तीसरी—पीड़ित परिवार को दिल्ली और बिहार सरकार की तरफ से तत्काल आर्थिक सहायता और सुरक्षा दी जाए। पप्पू यादव ने दो-टूक शब्दों में प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि अगर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

पाण्डव कुमार की हत्या सिर्फ एक युवक की मौत नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के विश्वास की हत्या है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए परदेस जाते हैं। पप्पू यादव के इस दौरे ने दिल्ली पुलिस पर दबाव तो बढ़ा दिया है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बिहार के इन बेटों को कभी उनकी पहचान के आधार पर निशाना बनाना बंद होगा?

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