लोकसभा चुनाव में सभी 40 सीटों के संयोजक रहे जीवेश कुमार पर केंद्रीय नेतृत्व का अटूट भरोसा, अमित शाह के बयान के बाद मंत्री पद की चर्चा तेज़
बिहार की राजनीति में कुछ सीटें ऐसी होती हैं जहां जीतना किसी करिश्मे से कम नहीं होता। दरभंगा की जाले सीट उन्हीं में से एक है। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में जहां बीजेपी की राह मुश्किल मानी जाती थी, वहां जीवेश कुमार ने लगातार तीसरी बार जीत की हैट्रिक लगाकर इतिहास रच दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान खुद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि उन्हें जिताइए, हम उन्हें ‘और बड़ा’ बनाएंगे। अब जब बिहार में नई सरकार का स्वरूप तय हो रहा है, तो सवाल उठता है—क्या जीवेश कुमार को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है?
जाले विधानसभा सीट का गणित हमेशा से टेढ़ा रहा है। सामाजिक और धार्मिक ध्रुवीकरण के बीच यहां बीजेपी के लिए जमीन तैयार करना कभी आसान नहीं था। लेकिन पेशे से वकील और छात्र जीवन से एबीवीपी के सिपाही रहे जीवेश कुमार ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। जमीन से जुड़ाव के कारण वे न केवल तीसरी बार विधायक बने, बल्कि उन्होंने साबित कर दिया कि विकास और संगठन के दम पर किसी भी दुर्ग को जीता जा सकता है।
जीवेश कुमार की पहचान सिर्फ एक विधायक की नहीं, बल्कि बीजेपी के एक मजबूत रणनीतिकार की भी है। लोकसभा चुनाव में बिहार की सभी 40 सीटों के संयोजक के तौर पर उनकी भूमिका की निगरानी सीधे दिल्ली से हो रही थी। सरकार में रहते हुए उनकी छवि एक ‘टास्क मास्टर’ की रही है। श्रम मंत्री के तौर पर उन्होंने ई-श्रम कार्ड योजना में बिहार को टॉप पर पहुंचाया, तो आईटी विभाग को पेपरलेस कर आधुनिक बनाया। पटना मेट्रो और फाइव-स्टार होटल जैसी परियोजनाओं की नींव रखने में भी उनका अहम योगदान रहा है।
दरभंगा की रैली में अमित शाह ने खुले मंच से कहा था— ‘जीवेश कुमार को तीसरी बार विधानसभा भेजिए, हम उन्हें और बड़ा बनाएंगे।‘ शाह का यह बयान राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के रूप में देखा गया। अब जब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार अपनी टीम चुन रही है, तो कयासों का बाजार गर्म है। क्या उन्हें किसी अहम मंत्रालय की कमान सौंपी जाएगी? उनकी कार्यशैली और सांगठनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें दरकिनार करना नामुमकिन लगता है।
जीवेश कुमार की हैट्रिक सिर्फ एक सीट की जीत नहीं है, बल्कि यह मिथिलांचल में बीजेपी की बढ़ती साख का प्रतीक है। अमित शाह का ‘और बड़ा बनाने’ का वादा कब और किस रूप में पूरा होता है, इस पर सबकी नज़रें टिकी हैं। क्या वे बिहार के अगले ‘पावर सेंटर’ बनेंगे?
