“बिहार में गुजरात की फैक्ट्रियों के लिए ‘सस्ता मजदूर’ तैयार करने का लक्ष्य है”: प्रशांत किशोर

बिहार की राजनीति में हार और जीत से इतर, प्रशांत किशोर ने एक नई बहस छेड़ दी है। पीके ने आरोप लगाया है कि अब बिहार की सत्ता उन हाथों में है जिनका लक्ष्य बिहार का विकास नहीं, बल्कि गुजरात की फैक्ट्रियों के लिए ‘सस्ता मजदूर’ तैयार करना है। चुनाव में 30 हजार करोड़ रुपये बांटने का गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशांत किशोर ने एलान किया है कि वे हार से थकने वाले नहीं हैं। जून 2026 से बिहार में ‘नवनिर्माण अभियान’ की शुरुआत होगी।

प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि— ‘बिहार अब गुजरात मॉडल पर चलेगा, यानी बिहार की गद्दी पर वो लोग बैठेंगे जिनकी प्राथमिकता गुजरात का विकास होगा।‘ पीके ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2014 से पहले जहां बिहार के 8 लाख युवा गुजरात में काम करते थे, आज यह संख्या बढ़कर 20 लाख हो गई है। उनके मुताबिक, सरकार की योजना बिहार में फैक्ट्रियां लगाने की नहीं, बल्कि यहां के युवाओं को 10-15 हजार रुपये की नौकरी के लिए गुजरात भेजने की है।

चुनाव परिणामों पर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने इसे जनता का नहीं, बल्कि ‘धनबल’ का फैसला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए 30 हजार करोड़ रुपये सरकारी पैसे बांटे गए और चुनाव आयोग से लेकर केंद्र सरकार तक ने मिलकर प्रपंच रचा। पीके ने सवाल उठाया कि— ‘जिस नेता को 200 से ज्यादा विधासकों का समर्थन प्राप्त हो वो अचानक पद क्यों छोड़ रहा है?’उनका इशारा बिहार की सत्ता में होने वाले बड़े बदलावों और नेतृत्व परिवर्तन की ओर था, जिसे उन्होंने पूर्व-नियोजित बताया।

भले ही चुनावी नतीजों में जनसुराज को कामयाबी नहीं मिली, लेकिन प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि उनका संकल्प नहीं टूटा है। जून 2026 से पूरे बिहार में ‘नवनिर्माण अभियान’ की शुरुआत की जाएगी। इस अभियान के तहत जनसुराज के संगठन को पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक पुनर्गठित (Restructure) किया जाएगा। इस दौरान उनके साथ ललन जी, प्रीतम सिंह और आशुतोष कुमार जैसे वरिष्ठ सहयोगी मौजूद रहे। पीके का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में एक ऐसा विकल्प तैयार करना है जो पलायन और भ्रष्टाचार की इस राजनीति को जड़ से खत्म कर सके।

प्रशांत किशोर ने हार को एक नई शुरुआत का नाम दिया है। क्या उनका ये ‘नवनिर्माण अभियान’ बिहार की जनता के बीच दोबारा भरोसा जगा पाएगा? और ‘गुजरात मॉडल’ वाले उनके आरोपों पर सरकार क्या जवाब देती है, ये देखना दिलचस्प होगा।

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