अभिव्यंजना’ में उतरीं 2000 से ज्यादा कलाकृतियां: सुपवा के छात्रों ने शब्दों से उकेरे महान हस्तियों के चेहरे

रोहतक: कला और रचनात्मकता का उत्सव ‘अभिव्यंजना’ एक बार फिर अपने पूरे शबाब पर है। डीएलसी-सुपवा में विजुअल आर्ट्स फैकल्टी द्वारा आयोजित इस वार्षिक प्रदर्शनी के 11वें संस्करण में छात्रों ने अपनी साल भर की मेहनत को 2000 से अधिक कलाकृतियों के रूप में पेश किया है। 5 मई से आम जनता के लिए खुली यह प्रदर्शनी 8 मई तक कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी रहेगी।

पांच विभागों का संगम: पेंटिंग से लेकर एनिमेशन तक

इस प्रदर्शनी में विजुअल आर्ट्स के पांच प्रमुख विभागों—एप्लाइड आर्ट, एनिमेशन, पेंटिंग, स्कल्पचर (मूर्तिकला) और प्रिंट मेकिंग—का शानदार समन्वय देखने को मिल रहा है। अंडर ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्रों ने अपनी कला के जरिए सामाजिक मुद्दों, धार्मिक प्रथाओं और भविष्य की सोच को कैनवास और मिट्टी पर उतारा है।

आसमान बना कैनवास: टहनियों से बयां किया ‘प्यार’

प्रदर्शनी में एक छात्र का ‘ट्विक्स आर्ट’ (Twigs Art) चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्र ने पेड़ की टहनियों के टुकड़ों को तारों से जोड़कर ‘LOVE’ शब्द बनाया है। खास बात यह है कि इसे ऊंचाई पर लटकाया गया है, जिससे नीला आसमान इसका ‘कैनवास’ नजर आता है। छात्र का कहना है कि प्यार की व्यापकता आसमान से भी बड़ी है, इसलिए इसे चार अक्षरों में नहीं बांधा जा सकता।

टाइपोग्राफी आर्ट: बिना लाइन खींचे बनाए चेहरे

छात्रों की रचनात्मकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बिना कोई लाइन खींचे, सिर्फ शब्दों के इस्तेमाल से मशहूर हस्तियों के पोर्ट्रेट तैयार किए हैं।

  • लता मंगेशकर के चित्र में उनके गीतों के बोल पिरोए गए हैं।
  • रविंद्र नाथ टैगोर के चित्र में उनके महान विचार नजर आते हैं।
  • इसके अलावा शाहरुख खान, किशोर कुमार और अनिल कपूर जैसी हस्तियों के चेहरों को भी टाइपोग्राफी तकनीक से बखूबी उकेरा गया है।

कला के साथ मनोरंजन और शॉपिंग का तड़का

प्रदर्शनी केवल देखने तक सीमित नहीं है, यहाँ आगंतुकों के लिए मनोरंजन का भी पूरा इंतजाम है:

  • ओपन स्टेज: डिजाइन बिल्डिंग के आंगन में शाम 6:30 से रात 8:00 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती है।
  • सेल्फी पॉइंट्स और स्टॉल्स: कैंपस में कई सेल्फी पॉइंट्स बनाए गए हैं। साथ ही छात्रों ने खुद के तैयार किए हुए सजावटी सामान और मेकअप प्रोडक्ट्स के स्टॉल्स भी लगाए हैं, जहाँ से लोग खरीदारी कर सकते हैं।
  • ज्यामितीय पैटर्न: रैंप हॉल में पीओपी (POP) की मदद से तैयार ज्यामितीय आकृतियों को छत से लटकाया गया है, जो दर्शकों को एक जादुई अनुभव देते हैं।

आम जनता के लिए मौका

3 मई को उद्घाटन के बाद, यह प्रदर्शनी अब स्कूल के बच्चों, शहर के लोगों और दूर-दूर से आए कला प्रेमियों के लिए खुली है। आधुनिक सोच और भारतीय परंपराओं का यह मेल 8 मई तक जारी रहेगा।

अगर आप भी कला की बारीकियों और छात्रों के ‘इमोशन्स’ को करीब से देखना चाहते हैं, तो ‘अभिव्यंजना’ आपके लिए एक बेहतरीन गंतव्य है।

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