मौत के खिलाफ बेगूसराय में ‘महा-अभियान’! 1000 छात्रों ने सीखी सीपीआर की तकनीक, रामानंद बाबू की पुण्यतिथि पर बना रिकॉर्ड

बेगूसराय, बिहार: क्या आप जानते हैं कि आपके हाथों में किसी की बुझती हुई सांसों को फिर से लौटाने की ताकत है? हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बढ़ते मामलों के बीच बिहार के बेगूसराय से एक ऐसी उम्मीद की किरण जागी है, जो देश के 15 करोड़ लोगों को ‘जीवन रक्षक’ बनाने का दम रखती है। चर्चित अफसर रहे स्मृतिशेष रामानंद प्रसाद शर्मा की पुण्यतिथि पर उनके पैतृक गाँव में लगा स्वास्थ्य मेला किसी उत्सव से कम नहीं था। यहाँ डॉक्टरों ने दवाइयां ही नहीं दीं, बल्कि हज़ारों बच्चों और युवाओं को वो तकनीक सिखाई जिससे किसी की रुकती हुई धड़कन को फिर से शुरू किया जा सके।

बेगूसराय का केशावे गाँव आज एक ट्रेनिंग सेंटर में तब्दील हो गया। मौका था ईमानदार अफसर रामानंद प्रसाद शर्मा की तीसरी पुण्यतिथि का। उनके पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार ने इस दिन को एक मिशन बना दिया है। इस बार 50 से अधिक दिग्गज डॉक्टरों की मौजूदगी में लगभग 1000 लोगों को CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण दिया गया। चौंकाने वाली बात यह थी कि बेगूसराय के विभिन्न स्कूलों के 8वीं और 9वीं के छात्र डमी पर पूरी एकाग्रता के साथ धड़कनें वापस लाने का अभ्यास कर रहे थे।

अभिरंजन कुमार का मानना है कि जिस तरह हार्ट अटैक एक महामारी बन रहा है, देश के हर 10वें व्यक्ति को सीपीआर आना चाहिए। इस मुहिम को समर्थन देने के लिए बीबीसी के पूर्व पत्रकार मणिकांत ठाकुर और स्वर शारदा फाउंडेशन के अंशुमान सिन्हा भी पहुँचे। अंशुमान सिन्हा ने एलान किया कि वे संगीत के जरिए इस अभियान को घर-घर पहुँचाएंगे। कार्यक्रम में मशहूर शिक्षक गुरु रहमान को ‘रामानंद बाबू ऑनेस्टी अवॉर्ड’ से नवाजा गया, जबकि डॉ. निशांत रंजन और डॉ. अशित को ‘स्वास्थ्य नायक सम्मान’ दिया गया।

दिन भर चले इस स्वास्थ्य शिविर के बाद शाम सुरमयी भजनों के नाम रही। गायिका वंशिका सिन्हा ने जब “जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है” गाया, तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। सभा के अंत में अभिरंजन कुमार ने सभी को सामूहिक शपथ दिलाई कि वे न केवल खुद यह कला सीखेंगे, बल्कि दूसरों को भी सिखाएंगे। केशावे से उठी यह लहर अब बिहार के गाँव-गाँव तक पहुँचने को तैयार है।

किसी की याद में पत्थर की मूर्तियाँ तो बहुत लगती हैं, लेकिन किसी की याद में हज़ारों लोगों को ‘जीवन रक्षक’ बना देना, समाज के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। अभिरंजन कुमार की यह पहल बता रही है कि अगर संकल्प बड़ा हो, तो एक छोटा सा गाँव भी पूरे देश को रास्ता दिखा सकता है।

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