जेल गए राजपाल यादव की मदद के लिए आगे आए सोनू सूद, बोले— “ये दान नहीं, सम्मान है”

मुंबई: सिनेमा के पर्दे पर करोड़ों चेहरों पर मुस्कान लाने वाला कलाकार आज खुद गहरे दर्द और अकेलेपन में है। 16 साल पुराना एक कर्ज और बाउंस हुए चेक की सजा ने बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता राजपाल यादव को तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। सरेंडर करने से पहले राजपाल यादव की आँखों में आंसू थे और जुबां पर बेबसी। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में जब पूरी इंडस्ट्री खामोश थी, तब ‘मसीहा’ बनकर सामने आए हैं सोनू सूद। सोनू ने न सिर्फ राजपाल की मदद का हाथ बढ़ाया है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री को आईना भी दिखाया है।

4 फरवरी की शाम 4 बजे—यह वह वक्त था जब राजपाल यादव को कानून के सामने घुटने टेकने पड़े। दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर करने से ठीक पहले राजपाल यादव पूरी तरह टूट गए। जेल अधिकारियों के सामने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, “सर क्या करुं? मेरे पास पैसे नहीं है। कोई और रास्ता नहीं दिख रहा। यहां सब अकेले हैं, कोई दोस्त नहीं होता।“ ये शब्द उस अभिनेता के थे जिसने सालों तक दुनिया को हंसाया, लेकिन आज वह खुद को दुनिया का सबसे अकेला इंसान महसूस कर रहा है।

राजपाल की इस बेबसी ने जहाँ उनके फैंस को दुखी किया, वहीं सोनू सूद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें ‘रियल हीरो’ क्यों कहा जाता है। सोनू ने एक भावुक ट्वीट कर पूरी फिल्म इंडस्ट्री को झकझोर दिया। सोनू ने लिखा— “राजपाल यादव एक बेहद टैलेंटेड एक्टर हैं। कभी-कभी समय खराब होता है, टैलेंट नहीं। वह मेरी अगली फिल्म का हिस्सा होंगे।“ सोनू ने प्रड्यूसर्स और डायरेक्टर्स से अपील की है कि राजपाल को भविष्य के काम के बदले एडवांस राशि दी जाए, जिसे उन्होंने ‘सम्मान’ का नाम दिया। सोनू का यह कदम राजपाल के डूबते करियर और मनोबल के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आया है।

राजपाल यादव इस मामले में पहले भी 2013 में जेल जा चुके हैं। जून 2024 में हाई कोर्ट ने उन्हें यह सोचकर राहत दी थी कि वे ‘आदतन अपराधी’ नहीं हैं, लेकिन किश्तें न चुका पाने की वजह से अब कानून ने अपना शिकंजा कस दिया है। सोशल मीडिया पर लोग सोनू सूद की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कोई उन्हें ‘कलयुग का कर्ण’ कह रहा है, तो कोई कह रहा है कि राजपाल को बचाने के लिए पूरी इंडस्ट्री को एकजुट होना चाहिए।

राजपाल यादव की गिरफ्तारी फिल्म इंडस्ट्री के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जहाँ सफलता के साथ हजारों हाथ होते हैं, लेकिन नाकामी के दौर में इंसान खुद को तिहाड़ की दहलीज पर खड़ा पाता है। सोनू सूद की पहल ने एक चिंगारी सुलगा दी है, अब देखना यह है कि क्या बॉलीवुड के बाकी दिग्गज इस ‘सम्मान की राशि’ की मुहिम में साथ आते हैं या राजपाल को यह लड़ाई अकेले ही लड़नी होगी।

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