‘मर्दानी 3’ रिव्यू: फिर चला रानी मुखर्जी का जादू! बच्चियों की सुरक्षा पर बनी साल की सबसे धाकड़ फिल्म

सिनेमा के पर्दे पर पुलिस की छवि अक्सर विवादों में रहती है, लेकिन जब रानी मुखर्जी ‘शिवानी शिवाजी रॉय’ बनकर आती हैं, तो खाकी का सम्मान बढ़ जाता है। ‘मर्दानी’ फ्रैंचाइजी की तीसरी फिल्म रिलीज हो गई है। लगभग दो घंटे की यह फिल्म आपको अपनी कुर्सी से हिलने का मौका नहीं देती। दिल्ली में रानी ने खुद कहा था कि उन्हें ऐसे प्रोजेक्ट्स का इंतजार रहता है जो समाज को आईना दिखाएं।

‘मर्दानी 3’ की कहानी पिछली दोनों फिल्मों से कहीं ज्यादा गहरी और इमोशनल है। इस बार फिल्म का मुद्दा है—छोटी बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराध और मानव तस्करी (Human Trafficking)। फिल्म की शुरुआत से ही डायरेक्टर ने माहौल को काफी गंभीर रखा है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस शिवानी रॉय (रानी मुखर्जी) के पास आता है, जहाँ एक बड़े अफसर की बेटी के साथ घर की नौकरानी की बच्ची भी गायब हो जाती है।

शिवानी को जांच में पता चलता है कि ये सिर्फ एक किडनैपिंग नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा रैकेट है, जिसके चंगुल में 90 से ज्यादा बच्चियां फंसी हैं। फिल्म की स्क्रिप्ट इतनी कसी हुई है कि 2 घंटे कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता। खासकर इंटरवल के बाद फिल्म की रफ़्तार इतनी तेज है कि अगर आपने एक पल के लिए भी स्क्रीन से नजर हटाई, तो आप कहानी की कड़ी मिस कर सकते हैं। रानी मुखर्जी ने एक पुलिस अफसर की थकान और उसके अंदर के गुस्से को बखूबी पर्दे पर उतारा है।

एक्टिंग की बात करें तो यह पूरी तरह रानी की फिल्म है, लेकिन इस बार उन्हें टक्कर देने के लिए खड़ी हैं मल्लिका प्रसाद, जिन्होंने विलेन ‘अम्मा’ का रोल निभाया है। मल्लिका की मौजूदगी स्क्रीन पर डर पैदा करती है। फिल्म में पुलिस का किरदार निभाने के लिए रानी मुखर्जी ने 20 दिन की वर्कशॉप की थी, जो उनके चेहरे के हाव-भाव और एक्शन में साफ नजर आती है।

मर्दानी 3 केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उन अपराधियों को चेतावनी है जो मासूमों की जिंदगी से खेलते हैं। रानी मुखर्जी ने साबित कर दिया है कि बिना मसाला और बिना तीन घंटे की लंबाई के भी एक शानदार फिल्म बनाई जा सकती है। अगर आप बेहतरीन एक्टिंग और थ्रिलर के शौकीन हैं, तो यह फिल्म मिस मत कीजिए।

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