बंगाल में बीजेपी का नया ‘चाणक्य’ अवतार! नितिन नवीन ने टीएमसी को घेरने के लिए बनाया ‘मैन-टू-मैन’ प्लैन

पश्चिम बंगाल की सत्ता तक पहुँचने के लिए बीजेपी ने इस बार अपना गियर बदल दिया है। नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने दुर्गापुर में हुई पहली कोर कमेटी की बैठक में साफ कर दिया कि 2026 की जंग सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक होगी। टीएमसी के ‘बंगाली अस्मिता’ वाले कार्ड को फेल करने के लिए बीजेपी अब ‘बंगाल का खोया गौरव’ वापस लाने का नया नरेटिव लेकर मैदान में उतरी है।

बीजेपी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी पहली ही आधिकारिक यात्रा के लिए बंगाल को चुनकर अपनी प्राथमिकता साफ कर दी है। दुर्गापुर के आईटीसी फॉर्च्यून होटल में बंद कमरे में हुई बैठक में 2021 की हार की रिपोर्ट टेबल पर रखी गई। सूत्रों के मुताबिक, नबीन ने स्पष्ट किया कि इस बार गलतियों की गुंजाइश नहीं है। रणनीति में सबसे बड़ा बदलाव ‘मैन-टू-मैन मार्किंग’ का है। यानी टीएमसी के हर दांव और उनके हर कद्दावर नेता के लिए बीजेपी के पास अब एक खास ‘काउंटर-प्लान’ होगा।

नितिन नबीन ने संगठन में सुस्ती को खत्म करने के लिए ’15-डे रिपोर्ट’ सिस्टम लागू किया है। अब हर 15 दिन में राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद बंगाल की रिपोर्ट लेंगे, जिसका सीधा मतलब है कि दिल्ली अब बंगाल की हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखेगी। नवीन का मंत्र है—चुनाव सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि ‘स्थानीय समस्याओं’ पर लड़ा जाएगा। अब जिम्मेदारी जिला और विधानसभा स्तर पर बांट दी गई है ताकि हर क्षेत्र की समस्या के हिसाब से रणनीति बनाई जा सके।

बीजेपी इस बार टीएमसी के ‘बाहरी बनाम भीतरी’ वाले कार्ड को जड़ से खत्म करना चाहती है। दुर्गापुर में ‘कमल मेला’ के जरिए नितिन नबीन ने बंगाल की संस्कृति, कला और मिट्टी से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि बंगाल की धरती राजा राममोहन राय और ईश्वर चंद्र विद्यासागर की है, और बीजेपी का लक्ष्य उस खोए हुए गौरव को वापस दिलाना है जो पिछले कुछ दशकों में धुंधला पड़ गया है। यह लड़ाई अब ममता बनर्जी की ‘बंगाली पहचान’ बनाम बीजेपी के ‘विकसित बंगाल’ के विजन के बीच होगी।

नितिन नबीन की यह नई रणनीति बताती है कि बीजेपी अब बंगाल को सिर्फ एक चुनावी राज्य नहीं, बल्कि अपनी साख की लड़ाई मान रही है। ‘मैन-टू-मैन मार्किंग’ और ‘खोया गौरव’ का ये दांव टीएमसी के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनेगा, यह आने वाले महीनों में साफ हो जाएगा। लेकिन एक बात तय है, 2026 की जंग बेहद दिलचस्प होने वाली है।

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