“भीतरघातियों को बाहर निकालो”—हार के बाद मनेर विधायक भाई वीरेंद्र का फूटा गुस्सा, नेतृत्व पर उठाए गंभीर सवाल
बिहार चुनाव के नतीजों ने आरजेडी को गहरे सदमे में डाल दिया है, लेकिन अब यह सदमा ‘विद्रोह’ की शक्ल लेता दिख रहा है। पार्टी के पुराने सिपाही और विधायक भाई वीरेंद्र ने हार का ठीकरा नेतृत्व और ‘भीतरघातियों’ पर फोड़ दिया है। भाई वीरेंद्र ने यहाँ तक कह दिया कि तीन जिलों की जिम्मेदारी जिन लोगों के पास थी, उन्होंने पार्टी को ‘बेच’ दिया।
मनेर से आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने चुनाव परिणामों के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने दो टूक कहा कि पार्टी के पुराने और वफादार नेताओं का टिकट काटकर नए चेहरों को देना हार की बड़ी वजह रही। भाई वीरेंद्र का सीधा हमला उन लोगों पर है जिन्होंने टिकट वितरण में मनमानी की। उन्होंने आरोप लगाया कि शाहाबाद क्षेत्र के तीन जिले—कैमूर, रोहतास और बक्सर—एक ही व्यक्ति के अंडर में थे, जिसने पूरी पार्टी के हितों को ‘बेच’ दिया।
भाई वीरेंद्र ने स्पष्ट किया कि वे बगावत नहीं कर रहे, बल्कि पार्टी को बचाने के लिए कड़वा सच बोल रहे हैं। उन्होंने अपनी समाजवादी पृष्ठभूमि और पार्टी के प्रति अपनी वफादारी की याद दिलाते हुए कहा— मैंने पार्टी के लिए लाठियां खाई है, जेल गया हूं। जब पार्टी टूट रही थी तब मैंने उसे बचाया। अगर मुझे पद का लालच होता तो कब का सांसद या मंत्री बन गया होता। उन्होंने मांग की है कि जिन लोगों ने पार्टी का शोषण किया और भीतरघात किया, उन्हें तुरंत बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
भाई वीरेंद्र के इस बयान ने आरजेडी के भीतर मचे असंतोष को सतह पर ला दिया है। चुनाव में करारी हार के बाद तेजस्वी यादव पहले से ही दबाव में हैं, और अब अपने ही वरिष्ठ नेताओं के ये सवाल नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी अब हार की समीक्षा करेगी या भाई वीरेंद्र जैसे पुराने नेताओं की आवाज को अनसुना कर दिया जाएगा?
भाई वीरेंद्र का यह हमला संकेत है कि आरजेडी की हार के बाद अब जिम्मेदारी तय करने का वक्त आ गया है, और अगर नेतृत्व ने जल्द ही इन सवालों के जवाब नहीं दिए, तो आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर असंतोष की यह आग और भड़क सकती है।
