सारंडा में माओवाद का सूर्यास्त! ऑपरेशन मेगाबुरु में करोड़ों के इनामी समेत 16 ढेर

झारखंड के सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद की कमर तोड़ते हुए एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। 36 घंटे से अधिक समय से चल रहे ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ में अब तक कुल 16 माओवादियों को ढेर किया जा चुका है। इसमें माओवादियों की सबसे बड़ी ताकत माना जाने वाला और 2.35 करोड़ रुपये का इनामी ‘अनल दा’ भी मारा गया है। केंद्र सरकार के ‘नक्सल मुक्त भारत 2026’ के संकल्प की दिशा में यह अब तक का सबसे निर्णायक प्रहार है।

एशिया के सबसे घने जंगलों में शुमार सारंडा, जो कभी नक्सलियों का ‘अघोषित मुख्यालय’ था, वहां गुरुवार सुबह 6 बजे से गोलियों की गूंज सुनाई दे रही है। कोबरा 209 बटालियन, झारखंड जगुआर और सीआरपीएफ के करीब 1500 जवानों ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।

इस बड़ी सफलता पर गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों को बधाई देते हुए इसे ‘बड़ी जीत’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि माओवाद को 31 मार्च 2026 से पहले पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। झारखंड पुलिस के IG ऑपरेशंस माइकल राज एस ने पुष्टि की है कि अनल दा के खात्मे के साथ ही माओवादियों का थिंक-टैंक पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। अब केवल मिसिर बेसरा ही एक बड़ा नाम बचा है, जिसकी तलाश जारी है।

मुठभेड़ भले ही थम गई हो, लेकिन 36 घंटों से सुरक्षा एजेंसियां चप्पे-चप्पे की तलाशी ले रही हैं। आईईडी (IED) के खतरों को देखते हुए जवान बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं। मारे गए सभी माओवादियों के शवों को जिला मुख्यालय लाकर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस ने बचे हुए नक्सलियों से अपील की है कि वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें, वरना अंजाम अनल दा जैसा ही होगा। ऑपरेशन मेगाबुरु’ ने न केवल माओवादियों की संख्या कम की है, बल्कि उनके दशकों पुराने आतंक के साम्राज्य को जड़ से हिला दिया है।

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