बिहार का पहला जल-मेट्रो प्रोजेक्ट! दीघा से लेकर गाय घाट तक बनेंगे अत्याधुनिक स्टेशन
पटना की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक और घंटों लंबे जाम से निपटने के लिए अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बिहार को जल्द ही अपनी पहली ‘वॉटर मेट्रो’ की सौगात मिलने वाली है। 769 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए गंगा की लहरों को यातायात के नए रूट के तौर पर विकसित किया जाएगा। 45 किलोमीटर के दायरे में फैले इस नेटवर्क से न केवल सफर का समय घटेगा, बल्कि दियारा से शहर आने वाले लाखों लोगों को एक आधुनिक विकल्प मिलेगा।
पटना की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कें अब वाहनों के बोझ से दबी हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार ने गंगा की विशाल जलराशि को यातायात के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया है। कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड ने पटना वॉटर मेट्रो के लिए अपनी फिजिबिलिटी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है। 769 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना के तहत 45 किलोमीटर की लंबाई में आधुनिक मेट्रो बोट्स का संचालन होगा।
इस परियोजना का सबसे अहम पहलू दियारा इलाके के लोगों की कनेक्टिविटी है। पटना वॉटर मेट्रो के रूट पर 10 अत्याधुनिक स्टेशन विकसित किए जाएंगे। पानापुर से लेकर कंगन घाट और चेचर घाट तक, गंगा के प्रमुख घाटों को नए स्वरूप में ढाला जाएगा। इससे कम समय और कम खर्च में आवागमन संभव हो सकेगा, जो अब तक पारंपरिक नावों के भरोसे था।
पटना की वॉटर मेट्रो केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। जल परिवहन और जल प्रबंधन के बीच तालमेल बैठते ही निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जो आने वाले समय में पटना की सूरत बदल देगी।
