अटल जी की 101वीं जयंती पर ‘डिजिटल’ नमन, WAVES पर रिलीज हुई ‘शत-शत अटल’

‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा…’ ये शब्द सिर्फ एक राजनीतिक भविष्यवाणी नहीं थे, बल्कि एक अटल विश्वास थे उस व्यक्तित्व का, जिसने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा बदल दी। आज जब पूरा देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती मना रहा है, तब ओटीटी की दुनिया में एक नई लहर आई है। प्रसार भारती के नए प्लेटफॉर्म ‘WAVES’ पर आज एक ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री रिलीज हुई है—‘शत-शत अटल’। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक युग का दस्तावेज है। अटल बिहारी वाजपेयी… एक ऐसा नाम जिसे उनके विरोधी भी सम्मान से पुकारते थे। डॉक्यूमेंट्री ‘शत-शत अटल’ हमें उसी दौर में वापस ले जाती है, जब भारतीय राजनीति में शुचिता और सिद्धांतों की बात होती थी।

इस डॉक्यूमेंट्री को पर्दे पर उतारने के पीछे एक मंझी हुई टीम का हाथ है। इसके डायरेक्टर अतुल पांडेने बहुत ही संवेदनशीलता के साथ अटल जी के निजी और सार्वजनिक जीवन के बीच एक शानदार संतुलन बिठाया है। फिल्म में उनके ग्वालियर के बचपन से लेकर दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक के सफर को बहुत ही खूबसूरती से फिल्माया गया है। वहीं फिल्म की प्रोड्यूसर रेखा गंगवार और क्रिएटिव प्रोड्यूसर अतुल गंगवार ने इस प्रोजेक्ट को एक मिशन की तरह लिया, ताकि नई पीढ़ी को बताया जा सके कि एक पत्रकार और कवि कैसे देश का सबसे चहेता प्रधानमंत्री बना।

प्रसार भारती का ‘WAVES’ प्लैटफॉर्म अब सिर्फ सूचना का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने वाला एक डिजिटल पुस्तकालय बन गया है। ‘शत-शत अटल’ की रिलीज के साथ ही इस ऐप पर ट्रैफिक की बाढ़ आ गई है। युवा दर्शक, जो शायद अटल जी के दौर को उतना करीब से नहीं देख पाए, वे इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए उस ‘अटल युग’ का अनुभव कर रहे हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर कहते थे कि ‘छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता’। उनकी यही सीख इस डॉक्यूमेंट्री की आत्मा है। ‘शत-शत अटल’ हमें याद दिलाती है कि राजनीति में भी गरिमा और शब्द की मर्यादा कितनी जरूरी है। अगर आप भी भारतीय इतिहास के सबसे सुनहरे पन्नों को पलटना चाहते हैं, तो आज ही ‘वेव्स’ पर इस फिल्म को जरूर देखें।

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