पश्चिम उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संपर्क प्रमुख आनंद जी का आकस्मिक निधन, संगठन और समाज में शोक की लहर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक और पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संपर्क प्रमुख आनंद जी का सोमवार, 22 दिसम्बर 2025 को आकस्मिक निधन हो गया। सहारनपुर प्रवास के दौरान हृदय गति रुकने से उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही संघ परिवार, विभिन्न सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई है।

आगरा से शुरू हुआ राष्ट्र सेवा का सफर

वर्ष 1957 में आगरा के एक प्रतिष्ठित परिवार में बसंत लाल अग्रवाल और सावित्री देवी अग्रवाल के घर जन्मे आनंद जी बचपन से ही मेधावी थे। पांच भाई-बहनों में चौथे स्थान पर रहे आनंद जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आगरा में ही पूरी की। वर्ष 1982 में उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण की। पेशेवर करियर में बड़ी संभावनाओं के बावजूद, छात्र जीवन में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अधीश जी के संपर्क में आए, जिससे उनके जीवन की धारा बदल गई।

प्रचारक के रूप में चार दशकों का समर्पण

श्री अधीश जी की प्रेरणा से आनंद जी ने वर्ष 1984 में प्रचारक के रूप में घर का त्याग किया और राष्ट्र सेवा का व्रत लिया। उनके प्रचारक जीवन की यात्रा मेरठ से शुरू हुई, जहाँ उन्होंने तहसील और जिला प्रचारक के रूप में कार्य किया।

उनके प्रमुख दायित्व:

  • 1992: सहारनपुर विभाग के सह-विभाग प्रचारक और प्रांत सेवा प्रमुख।
  • विभाग प्रचारक: नैनीताल और गाजियाबाद में संगठन को मजबूती दी।
  • प्रांत नेतृत्व: मेरठ प्रांत के सह-प्रांत प्रचारक और कानपुर प्रांत के प्रांत प्रचारक रहे।
  • अखिल भारतीय व्यवस्था टोली के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
  • वर्तमान दायित्व: वर्ष 2019 से वे पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संपर्क प्रमुख के रूप में कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन कर रहे थे।

आनंद जी को संगठन में ‘कर्मठता की प्रतिमूर्ति’ माना जाता था। खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने कभी विश्राम नहीं किया और निरंतर प्रवास पर रहकर कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते रहे। उनके करीबियों के अनुसार, उनकी जीवंतता ऐसी थी कि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी उनके कर्तव्य पथ में बाधा नहीं बन सकीं।

आनंद जी का आकस्मिक निधन न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र के निर्माण और संगठन के विस्तार में लगा दिया। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है।

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