बिहार में ‘गुंडा बैंक’ का होगा अंत: उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का ऐलान, सूदखोरों की अब खैर नहीं
बिहार में नई सरकार की गठन के बाद से ही अतिक्रमण हटाओ अभियान लगातार जारी है। जहां प्रशासन इसे शहर को व्यवस्थित करने की कवायद बता रहा है, वहीं फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों के लिए यह बुलडोजर उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला बन गया है।
पटना सिटी में आज दिन भर अफरा-तफरी का माहौल रहा। जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने चौक थाना क्षेत्र की सब्ज़ी मंडी और अगमकुआं के मीट बाज़ार-मछली मार्केट को निशाना बनाया। प्रशासन की कार्रवाई इतनी ताबड़तोड़ थी कि दुकानदारों को सामान समेटने का भी पूरा मौका नहीं मिला। प्रशासनिक टीम का कहना था कि दुकानदारों को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। लिहाजा, टीम ने मौके पर ही बुलडोजर चलाकर सड़क किनारे लगी रेहड़ियों और खुले में लगी दुकानों को हटाना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में तनाव और विरोध का माहौल बन गया।
मीट बाज़ार और मछली मार्केट में कार्रवाई के दौरान कई दुकानदार फूट-फूटकर रो पड़े। एक पुरुष दुकानदार ने रोते हुए गुस्से में आरोप लगाया, “सरकार हमारे रोज़गार को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के खत्म कर रही है। क्या हम जहर खाकर मर जाएं? बच्चों को क्या खिलाएं?” दुकानदार का कहना है कि वर्षों से यही उनका एकमात्र सहारा है। वहीं, एक महिला दुकानदार ने रोते हुए सरकार से गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि पहले गरीबों को दुकान लगाने की सुरक्षित जगह दी जाए, उसके बाद ही कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रोज़ी-रोटी छीन ली जाएगी, तो मजबूरी में लोग गलत रास्ते पर चले जाएंगे।
एक तरफ शहर को व्यवस्थित करने की सरकारी कोशिश, दूसरी तरफ गरीबों की रोज़ी-रोटी का संकट। पटना में बुलडोजर विकास और बेबसी के बीच की दूरी को साफ दिखा रहा है।
