मोतिहारी में जहरीली शराब से 4 की मौत, 6 लोग हुए अंधे; इलाके में मचा हड़कंप

बिहार में एक बार फिर जहरीली शराब ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। मोतिहारी के तुरकौलिया और रघुनाथपुर इलाकों में संदिग्ध शराब पीने से 4 लोगों की जान चली गई है, जबकि आधा दर्जन लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छिन गई है। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए शराबबंदी कानून को पूरी तरह विफल करार दिया है।

मोतिहारी के तुरकौलिया और रघुनाथपुर में गुरुवार की रात मातम में बदल गई। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। स्थानीय प्रशासन ने अब तक 4 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें चंदू, परीक्षण मांझी और हीरा लाल महतो जैसे नाम शामिल हैं। जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तुरकौलिया के SHO और स्थानीय चौकीदार को सस्पेंड कर दिया है। 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और मामले की जांच के लिए SIT (एसआईटी) का गठन किया गया है।

इस त्रासदी के बाद तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार की बखिया उधेड़ दी है। तेजस्वी ने दावा किया कि शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक बिहार में 1300 से अधिक लोग जहरीली शराब की भेंट चढ़ चुके हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि— ‘शराबबंदी अब सिर्फ भ्रष्ट अधिकारियों और शराब माफियाओं के लिए कमाई का जरिया बन गई है।‘ तेजस्वी ने सीधे तौर पर कहा कि पुलिस की मिलीभगत से घर-घर शराब की होम डिलीवरी हो रही है और इसकी कीमत गरीब लोग अपनी जान देकर चुका रहे हैं।

विपक्ष का आरोप है कि नीतीश सरकार की नाक के नीचे समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। तेजस्वी ने अपने बयान में शराबबंदी को ‘कमाऊ पूत’ की संज्ञा दी है, जिससे सत्ताधारी दलों के कुछ नेताओं और भ्रष्ट तंत्र की जेबें भर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में शराबबंदी है, तो खुलेआम जहरीली शराब बन कैसे रही है? 6 लोगों की आंखों की रोशनी चले जाने की घटना को उन्होंने अत्यंत दुखद बताते हुए एनडीए सरकार की नैतिकता पर सवाल खड़े किए हैं।

मोतिहारी की ये घटना एक चेतावनी है कि पुलिसिया कार्रवाई और कागजी दावों के बावजूद ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। जहाँ एक तरफ सरकार शराबबंदी को अपनी बड़ी उपलब्धि मानती है, वहीं दूसरी तरफ हर कुछ महीनों में होने वाले ये ‘कांड’ कानून के क्रियान्वयन पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

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