‘पद्म भूषण’ लेने व्हीलचेयर से पहुंचीं अलका याज्ञनिक को देख भावुक हुए फैंस, दुर्लभ बीमारी SNHL से जूझ रहीं हैं

अपनी मखमली आवाज से पिछले चार दशकों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली मशहूर सिंगर अलका याज्ञनिक को लेकर इस वक्त एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया है। हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में अलका याज्ञनिक को ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया। लेकिन इस गौरवशाली पल के बीच जो तस्वीरें सामने आईं, उसने हर किसी को चौंका दिया।

करीब दो साल बाद किसी सार्वजनिक मंच पर नजर आईं अलका याज्ञनिक मंच तक पुरस्कार लेने के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेकर पहुंची थीं। 60 साल की उम्र में अपनी पसंदीदा सिंगर को इस हालत में देख फैंस के मन में एक ही सवाल गूंज उठा कि आखिर अलका जी को क्या हुआ है? इस सवाल का जवाब खुद अलका याज्ञनिक ने बिना देर किए एक भावुक नोट के जरिए दिया है।

अपनी सेहत को लेकर उड़ रही खबरों के बीच अलका याज्ञनिक ने सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के साथ एक बेहद निजी और दर्दभरा नोट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि वह पिछले दो सालों से लाइमलाइट, पब्लिक अपीयरेंस और यात्राओं से पूरी तरह दूर रही हैं, क्योंकि वह एक बेहद कठिन स्वास्थ्य चुनौती से गुजर रही हैं।

अलका याग्निक ने खुलासा किया कि वह एक दुर्लभ बीमारी सेंसरी-न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस (SNHL) से जूझ रही हैं, जो एक वायरल अटैक के कारण हुई है। अलका याग्निक के शब्दों में— ‘कुछ हफ्ते पहले जब मैं फ्लाइट से उतरी, तो मुझे अचानक महसूस हुआ कि मैं कुछ भी सुन नहीं पा रही हूं। इस अचानक आए बड़े झटके ने मुझे पूरी तरह से चौंका दिया, लेकिन अब मैं इसे स्वीकार करने की कोशिश कर रही हूं।’ अलका जी ने इस मुश्किल वक्त में दुआएं भेजने वाले अपने तमाम फैंस का दिल से शुक्रिया अदा किया है।

मेडिकल साइंस की भाषा में कहें तो सुनने की क्षमता को हमेशा के लिए खोने के सबसे आम और खतरनाक प्रकार को ही सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस यानी SNHL कहा जाता है। यह तब होता है जब कान के अंदरूनी हिस्से यानी कॉक्लिया में मौजूद छोटी-छोटी हेयर सेल्स, जो कान से दिमाग तक आवाज के सिग्नल ले जाने वाली ऑडिटरी नर्व का हिस्सा होती हैं, पूरी तरह डैमेज हो जाती हैं।

एक बार जब ये नर्व्स डैमेज हो जाती हैं, तो ये आमतौर पर अपने आप ठीक नहीं हो पातीं। डॉक्टरों के मुताबिक, अलका याज्ञनिक के पेशे से जुड़े तेज संगीत के कारण भी यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा बढ़ती उम्र, वायरल संक्रमण, सिर की चोट, या लगातार हेडफोन के जरिए तेज आवाज के संपर्क में रहने वाले लोगों में इसका जोखिम सबसे ज्यादा होता है। अलका जी ने भी अपने नोट में विशेष रूप से युवा फैंस को तेज म्यूजिक और हेडफोन के इस्तेमाल के जोखिम के प्रति सचेत रहने की सलाह दी है।

अलका याज्ञनिक का व्हीलचेयर पर बैठकर भी देश का इतना बड़ा सम्मान स्वीकार करना यह दिखाता है कि उनका आत्मबल और हौसला कितना मजबूत है। उनकी आवाज ने दशकों तक भारत को गुनगुनाना सिखाया है, और आज पूरा देश उनके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।

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