मानवता के कल्याण के लिए बड़ी पहल, माता चान्नन देवी अस्पताल और दधीचि देह दान समिति के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है, और जब बात किसी को नया जीवन देने की हो, तो अंगदान और देहदान को दुनिया का सबसे बड़ा दान माना गया है। इसी पावन उद्देश्य और मानवता के कल्याण हेतु अंग, देह, नेत्र और टिशु दान के विषय में जागरूकता फैलाने के लिए दिल्ली में एक नई और बेहद महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है।
दिल्ली के जनकपुरी स्थित प्रतिष्ठित ‘माता चान्नन देवी अस्पताल’ और पिछले 27 सालों से इस क्षेत्र में कार्यरत ‘दधीचि देह दान समिति’ ने आपस में सहयोग करने के लिए एक ऐतिहासिक MOU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य मकसद समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना और लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करना है।
माता चान्नन देवी अस्पताल और दधीचि देह दान समिति के बीच हुए इस समझौते के तहत अब बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान चलाया जाएगा। दोनों संस्थाएं मिलकर विशेष कैंप, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगी। इसके जरिए अस्पताल के स्टाफ, वहां आने वाले मरीजों, उनके परिवार-जनों और आम जनता के बीच अंगदान जैसे संवेदनशील विषय पर जागरूकता फैलाई जाएगी।
इस अभियान का एक बड़ा उद्देश्य समाज में अंगदान को लेकर फैली विभिन्न भ्रांतियों और अंधविश्वासों को पूरी तरह से दूर करना है। संस्थाओं के प्रतिनिधि लोगों की काउंसिलिंग करेंगे और उन्हें अंगदान का ‘संकल्प पत्र’ भरने के लिए प्रेरित करेंगे। इस पूरे तालमेल में दधीचि देह दान समिति का मुख्य काम बेहद खास होगा— समिति देहावसान यानी किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत अंगदान को सही समय पर क्रियान्वित कराने के लिए पीड़ित परिवार और सरकारी तंत्र के बीच एक मजबूत सूत्रधार की भूमिका निभाएगी।
इस ऐतिहासिक अवसर पर माता चान्नन देवी अस्पताल (MCDH) के मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉक्टर ए सी शुक्ला ने अंगदान की महत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में अंगों की उपलब्धता और जरूरत के बीच एक बहुत बड़ी खाई है, जिसे सिर्फ और सिर्फ जागरूकता के जरिए ही कम किया जा सकता है।
डॉक्टर शुक्ला के मुताबिक, जब समाज जागरूक होगा और लोग स्वेच्छा से आगे आएंगे, तभी देश में अंग विफलता (Organ Failure) से पीड़ित हजारों-लाखों गंभीर मरीजों में एक नए जीवन की आशा जगाई जा सकेगी। यह पहल चिकित्सा जगत और समाज दोनों के लिए एक नई दिशा तय करेगी।
वहीं, दधीचि देह दान समिति (DDS) के महासचिव डॉ. विशाल चड्ढा ने समाज के हर वर्ग से इस जन-अभियान में जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंगदान के विषय को बार-बार और हर बार समाज के बीच लेकर जाने की जरूरत है ताकि यह लोगों की सोच का हिस्सा बन सके।
डॉ. विशाल ने आह्वान किया कि इस संवेदनशील विषय को एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने साफ कहा कि एक स्वस्थ और सबल भारत के निर्माण में अंगदान की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और उनकी समिति भविष्य में अन्य संस्थाओं के साथ भी जुड़कर इस विचार को जन-जन तक फैलाएगी। आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक MOU पर दोनों प्रमुखों ने हस्ताक्षर किए, जिसकी गवाही अस्पताल के सिक्योरिटी इंचार्ज अनिल त्यागी और दधीचि समिति की उपाध्यक्ष सत्या गुप्ता ने दी।
210 बिस्तरों वाला जनकपुरी का यह प्रतिष्ठित मल्टी-डिसिप्लिनरी सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल और 27 सालों का बेदाग अनुभव रखने वाली दधीचि देह दान समिति का यह प्रयास वाकई वंदनीय है। जब चिकित्सा विज्ञान और सामाजिक संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो मानवता की जीत तय होती है। उम्मीद है कि यह नई शुरुआत देश में अंगदान के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी।
