प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता पर उठाए सवाल, पूछा— “10वीं कब और कहां से पास की?”
बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी का चेहरा तो बदल गया, लेकिन क्या बिहार का भविष्य भी बदलेगा? जन सुराज के प्रशांत किशोर का जवाब है— ‘कतई नहीं’। सम्राट चौधरी के शपथ लेते ही पीके ने उन पर हमलों की बौछार कर दी है। पीके ने न केवल सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि बीजेपी को ‘नई बीजेपी’ कहते हुए तंज कसा है कि अब बिहार का शासन पटना से नहीं, बल्कि गुजरात से चलेगा।
प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी के राजतिलक को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया है। पीके का तर्क है कि 2020 और उसके बाद के जनादेश नीतीश कुमार के चेहरे पर लिए गए थे, लेकिन बीजेपी ने बीच रास्ते में बिना चुनाव के एक ऐसा चेहरा थोप दिया है जिसे जनता ने मुख्यमंत्री पद के लिए नहीं चुना था। पीके ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह 2020 में जनादेश की चोरी हुई थी, आज सम्राट चौधरी को भी ‘पिछले दरवाजे’ से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया गया है। उनके मुताबिक, समारोह में बीजेपी के बड़े राष्ट्रीय नेताओं की अनुपस्थिति यह साबित करती है कि यह नियुक्ति कितनी अस्थिर और विवादित है।
हमले को व्यक्तिगत स्तर पर ले जाते हुए प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। पीके ने सीधे तौर पर पूछा— ‘सम्राट चौधरी अब मुख्यमंत्री हैं। कम से कम अब तो उन्हें बता देना चाहिए की उन्होंने 10वीं पास कब और कहां से की?’ पीके ने आरोप लगाया कि हलफनामे में सम्राट की डिग्रियों में विसंगतियां हैं। उन्होंने मदुरै से ‘पीएफसी’ और कैलिफोर्निया से ‘डॉक्टरेट’ की मानद उपाधियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बिहार आर्यभट्ट और चाणक्य की ज्ञान परंपरा की भूमि है, लेकिन यहाँ उपहार में ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जिसकी अपनी शिक्षा पर सवालिया निशान हैं।
प्रशांत किशोर ने ‘नई बीजेपी’ पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब बिहार की चाबी और रिमोट कंट्रोल अमित शाह के हाथों में होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार को अब गुजरात से चलाया जाएगा और राज्य की नीतियां बिहार के युवाओं के बजाय गुजरात के हितों को ध्यान में रखकर बनेंगी। पीके ने यहाँ तक कह दिया कि— ‘गुजरात के लोग मालिक बने रहेंगे और बिहार के ग्रैजुएट युवा वहां मजदूर बनकर काम करेंगे।‘ उन्होंने बीजेपी को चुनौती दी कि वे सम्राट चौधरी पर लगे पुराने दागों और आपराधिक मामलों पर सफाई दें, क्योंकि ‘नई बीजेपी’ में अब दागी चेहरों की ही पूछ होती है।
प्रशांत किशोर के इन हमलों ने साफ कर दिया है कि बिहार की नई सरकार के लिए हनीमून पीरियड बहुत छोटा होने वाला है। एक तरफ सम्राट चौधरी के सामने सुशासन की चुनौती है, तो दूसरी तरफ पीके जैसे रणनीतिकार की घेराबंदी।
