प्रणीत मोरे के शो में MBBS छात्रा सेजल द्वारा शवों का मज़ाक बनाने पर दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष आलोक कुमार ने जताई नाराजगी; कहा– ‘माफी नहीं, कोर्ट तय करे सजा’
दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष एवं सीनियर एडवोकेट, आलोक कुमार
नई दिल्ली: स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो में मेडिकल छात्रा सेजल द्वारा देहदान से प्राप्त शवों (कैडेवर) पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले को लेकर चिकित्सा जगत और सामाजिक संस्थाओं ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
‘दधीचि देह दान समिति’ के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) आलोक कुमार ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी गंभीर चिंता और कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यह मामला केवल छात्रा के माफी मांगने से खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि इस मामले में कानूनी तौर पर सजा मिलनी तय होनी चाहिए।
दधीचि देह दान समिति के अध्यक्ष आलोक कुमार ने सेजल के इस कृत्य को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा, “चिकित्सा शिक्षा का लाभ प्राप्त कर रही एक विद्यार्थी ‘सेजल‘ द्वारा सार्वजनिक मंच पर प्रणीत मोरे के कार्यक्रम में देहदान से प्राप्त शवों (कैडेवर) के संबंध में अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं। यह न केवल देहदाताओं और उनके परिवारों की भावनाओं को आहत करता है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा की गरिमा तथा उस पवित्र परंपरा का भी अनादर है, जिसके कारण लाखों विद्यार्थियों को सीखने का अवसर मिलता है।“
उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश में देहदान को केवल एक मेडिकल प्रोसेस नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सर्वोच्च सेवा और समर्पण का प्रतीक माना गया है। समाज के जागरूक, प्रतिष्ठित और आध्यात्मिक लोग अत्यंत श्रद्धा के साथ अपनी देह दान करते हैं ताकि भविष्य के डॉक्टर बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। ऐसे में इस पवित्र परंपरा का मजाक उड़ाना स्वीकार्य नहीं है।
आपको बता दें की प्रणीत मोरे के कॉमेडी शो में दर्शक के तौर पर पहुंची MBBS छात्रा सेजल पवार ने बताया था की कैसे वो प्रैक्टिकल पढ़ाई के दौरान शवों के प्राइवेट पार्ट का मज़ाक बनाती थी, जिसके बाद देशभर में उनके इस विवादित और अमर्यादित बयान का विरोध होने लगा। इस विवादित बयान के सामने आने के बाद चारों तरफ से इसकी तीखी आलोचना हो रही है। जनभावनाओं और चौतरफा दबाव के बाद संबंधित छात्रा सेजल ने सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना (माफी) भी मांगी है।
हालांकि, मामला अब पूरी तरह से कानूनी रूप ले चुका है। इस प्रकरण को लेकर विभिन्न स्तरों पर गंभीर संज्ञान लिया गया है:
- कानूनी कार्रवाई: मामले में शिकायतों के आधार पर एफआईआर (FIR) दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
- महिला आयोग की सक्रियता: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) तथा महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने भी इस विषय पर संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों से तुरंत जानकारी और स्पष्टीकरण मांगा है।
- AIMSA ने की कड़ी निंदा: ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने इस टिप्पणी की घोर निंदा की है। एसोसिएशन ने अपने बयान में याद दिलाया कि चिकित्सा शिक्षा में कैडेवर (शव) विद्यार्थियों के ‘प्रथम शिक्षक’ (First Teacher) होते हैं और उनके प्रति सम्मान बनाए रखना हर मेडिकल स्टूडेंट का नैतिक और व्यावसायिक दायित्व है।
वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार का स्पष्ट मत है कि समाज, चिकित्सा जगत और संस्थागत निकाय देहदान की गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने इस मामले के तार्किक अंत की मांग करते हुए कहा, “हम यह आशा करते हैं कि यह मामला केवल सेजल के क्षमा मांगने से पूरा नहीं होता। जो FIR हुई है, उसमें पूरी जांच होने के बाद कोर्ट में यह विषय जाना चाहिए और सेजल व प्रणीत मोरे को इसका दंड मिलना चाहिए।”
