एक्टर व सांसद मनोज तिवारी की मां का बड़ा खुलासा— बेटे को कामयाब देखने के लिए 18 साल रहीं नंगे पैर
कहते हैं कि पूत कपूत सुने हैं पर माता सुनी न कुमाता। एक मां अपने बच्चों की खुशियों और उनकी कामयाबी के लिए किस हद तक जा सकती है, इसका अंदाजा भी लगा पाना नामुमकिन है। भोजपुरी माटी के लाल और सांसद मनोज तिवारी आज जिस बुलंदी पर हैं, उसके पीछे उनकी मां ललिता देवी का एक ऐसा त्याग है, जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
शायद ही दुनिया में कोई ऐसी मां होगी जिसने अपने बेटों को सफल देखने के लिए करीब 18 साल तक पैरों में चप्पल तक नहीं पहनी! तपती धूप हो, कड़कड़ाती ठंड हो या फिर पथरीली राहें, इस मां के पैर कभी नहीं डगमगाए। खुद मनोज तिवारी को भी इतने सालों बाद जब मां के इस गुप्त संकल्प का पता चला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
मनोज तिवारी आज गायकी, अभिनय और राजनीति… हर क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं। हाल ही में उनके पॉडकास्ट के दौरान एक ऐसा पल आया जिसने हर किसी का दिल पिघला दिया। मनोज तिवारी ने जब अपनी मां ललिता देवी से पूछा कि ‘मां, आप इतने सालों से चप्पल क्यों नहीं पहन रही हैं?’, तो मां ने जो राज खोला, उसने मनोज तिवारी को अंदर तक हिलाकर रख दिया।
मां ने बताया कि करीब 18 साल पहले वो प्रयागराज के कुंभ मेले में गई थीं। उस वक्त उन्होंने नई चप्पल पहनी थी, लेकिन मेले में इस कदर कीचड़ था कि उनका पैर चप्पल सहित मिट्टी में धंस गया। काफी कोशिश के बाद जब पैर बाहर नहीं निकला, तो उन्होंने चप्पल वहीं छोड़ दी। लेकिन ये सिर्फ एक चप्पल छूटने की बात नहीं थी, उस घटना ने मां के मन पर गहरा असर किया और उन्होंने वहीं पर अपने जीवन का सबसे बड़ा और कठिन प्रण ले लिया।
चप्पल त्यागने के पीछे की असली वजह बताते हुए मां ललिता देवी ने कहा— ‘मैंने उसी वक्त तय कर लिया था कि अब चप्पल तभी पहनूंगी, जब मेरा बेटा कुछ बन जाएगा, दुनिया में उसका नाम हो जाएगा।‘ मां ने बताया कि वो दौर उनके परिवार के लिए बेहद मुश्किलों भरा था। घर आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, गाड़ी-घोड़े जैसी कोई सुविधा नहीं थी और कई-कई मील तक उन्हें नंगे पैर ही पैदल चलना पड़ता था।
लेकिन मां की प्रतिज्ञा सिर्फ एक बेटे के लिए नहीं, बल्कि अपने चारों बच्चों के लिए थी। उन्होंने मन में ठान लिया था कि जब उनके चारों बेटे अपने पैरों पर खड़े हो जाएंगे और जिंदगी में कामयाब हो जाएंगे, तभी वो दोबारा अपने पैरों में चप्पल पहनेंगी। साथ ही उन्होंने यह भी संकल्प लिया था कि वो फिर से एक दिन प्रयागराज जाएंगी, वहां नई चप्पल खरीदेंगी और उसे धारण करेंगी। मां की इस ममता और त्याग को सामने देख मनोज तिवारी खुद को रोक नहीं पाए और उनके आंसू बहने लगे।
इस बेहद भावुक पल का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मनोज तिवारी ने एक दिल छू लेने वाली बात लिखी। मनोज ने लिखा— ‘मां की ममता और त्याग का कोई हिसाब नहीं। वो बिना कुछ कहे अपने बच्चों के लिए क्या कुछ कर जाती है।‘ अब सोशल मीडिया पर मनोज तिवारी की मां की यह कहानी जंगल में आग की तरह वायरल हो रही है। लोग उनकी मां के इस अद्भुत संघर्ष और अटूट विश्वास को झुककर सलाम कर रहे हैं। फैंस का कहना है कि एक मां का आशीर्वाद और उसका बलिदान ही बच्चों की सबसे बड़ी ताकत होता है, तभी तो आज मनोज तिवारी इस मुकाम पर हैं।
आपको बता दें कि जहां एक तरफ मां ने 18 साल तक पैरों में चप्पल नहीं पहनी, वहीं आज उनके बेटे का जादू ऐसा चल रहा है कि उनका हालिया रिलीज गाना ‘राजा पैदल ना चले’ यूट्यूब पर मिलियन का आंकड़ा पार कर चुका है और दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है।
