झालाग्राम में चुनावी रैलियों के बीच बिहार के विक्रम साहो की दुकान पर झालमुड़ी खाने रुके पीएम, वीडियो हुआ वायरल

पश्चिम बंगाल की सियासी जंग के बीच झारग्राम की सड़कों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने राजनीति से परे मानवीय रिश्तों की एक नई इबारत लिख दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक अपना काफिला रुकवाया और एक आम दुकानदार से कहा— ‘भाई, मुझे अच्छे वाली झालमुड़ी खिलाओ’। दुकानदार भी कोई और नहीं, बल्कि बिहार के गया का रहने वाला एक युवा है।

पीएम मोदी ने जिस दुकानदार के हाथ की झालमुड़ी का लुत्फ उठाया, उसका नाम विक्रम साहो है। विक्रम मूल रूप से बिहार के गया जिले का रहने वाला हैं और रोजी-रोटी की तलाश में पश्चिम बंगाल के झारग्राम में दुकान चलाता है। विक्रम ने बताया कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री को अपनी दुकान के सामने देखा, तो उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। पीएम ने उनसे बड़े ही आत्मीय अंदाज में उनके परिवार और काम के बारे में पूछा।

झालमुड़ी बनाने के दौरान एक पल ऐसा आया जो सोशल मीडिया पर मीम बन गया है। विक्रम ने जब प्रधानमंत्री से पूछा— ‘क्या आप प्याज लेंगे?’ तो पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया— ‘हाँ, मैं प्याज खाता हूँ, दिमाग नहीं खाता।‘ इस हल्के-फुल्के अंदाज ने वहां मौजूद भीड़ और सुरक्षाकर्मियों को भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। पीएम ने विक्रम से उनकी शिक्षा के बारे में भी पूछा, जिस पर विक्रम ने बताया कि वे सिर्फ 9वीं पास हैं और आर्थिक तंगी की वजह से आगे नहीं पढ़ पाए।

झालमुड़ी का स्वाद लेने के बाद पीएम मोदी ने अपनी जैकेट की जेब से ₹10 का नोट निकाला और विक्रम को देने लगे। पहले तो विक्रम ने पैसे लेने से मना कर दिया, लेकिन पीएम के जोर देने पर उन्होंने वह नोट ले लिया। विक्रम ने बताया कि पीएम ने उनसे कोई राजनीतिक बात नहीं की, बस उनके माता-पिता (सुनीता देवी और

उत्तम साहो) का हाल जाना और ‘बढ़िया से रहो’ कहकर आगे बढ़ गए। हालांकि, विक्रम को एक बात का मलाल रह गया कि वे प्रधानमंत्री का ऑटोग्राफ नहीं ले पाए।

पीएम मोदी ने खुद इस पल की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि व्यस्त रविवार के बीच झारग्राम की झालमुड़ी ने उन्हें तरोताजा कर दिया। एक प्रधानमंत्री का सड़क किनारे रुककर ₹10 की झालमुड़ी खाना और एक बिहारी युवक की मेहनत को सम्मान देना, भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती को दर्शाता है। झारग्राम की ये झालमुड़ी अब सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि एक यादगार किस्सा बन चुकी है।

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