सीएम बनने के बाद पहली बार पटना साहिब पहुंचे सम्राट चौधरी, गुरु चरणों में टेका मत्था

बिहार के 24वें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी नई पारी की शुरुआत आस्था और भक्ति के साथ की है। शपथ ग्रहण के बाद आज सम्राट चौधरी पटना सिटी स्थित तख्त श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे। गुरु के दरबार में नतमस्तक होकर उन्होंने न केवल बिहार की खुशहाली की कामना की, बल्कि यह भी याद किया कि कैसे नगर विकास मंत्री रहते हुए उन्हें गुरु महाराज की सेवा का सौभाग्य मिला था। गुरुद्वारा कमेटी द्वारा भेंट की गई तलवार हाथ में लिए सम्राट चौधरी का अंदाज़ आज काफी अलग दिखा।

दोपहर करीब एक बजे का वक्त था, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का काफिला पटना साहिब गुरुद्वारे पहुंचा। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका यहाँ पहला दौरा था। उन्होंने दरबार साहिब के अंदर जाकर पूरी श्रद्धा के साथ गुरु महाराज के चरणों में मत्था टेका। इस दौरान उन्होंने कुछ देर बैठकर शबद कीर्तन भी सुना और गुरुद्वारे के शांत एवं धार्मिक माहौल में समय बिताया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से उन्हें सम्मान स्वरूप एक तलवार भेंट की गई, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

गुरु दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद मुख्यमंत्री ने पुरानी यादों को ताज़ा किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब गुरु गोविंद सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व मनाया गया था, तब वे बिहार के नगर विकास मंत्री थे और उस भव्य आयोजन के प्रबंधन में उन्हें बड़ी भूमिका निभाने का अवसर मिला था। सम्राट चौधरी ने यहाँ पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 साल के शासनकाल की भी सराहना की और कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार में काफी विकास हुआ है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि गुरु गोविंद सिंह जी की प्रेरणा और पीएम मोदी के नेतृत्व में बिहार अब समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएगा।

सम्राट चौधरी की यह धार्मिक यात्रा बुधवार से ही शुरू हो गई थी। शपथ ग्रहण के लिए लोक भवन जाने से पहले उन्होंने राजवंशी नगर हनुमान मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की थी। हनुमान जी के बाद अब गुरु महाराज का आशीर्वाद लेकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार ‘सर्वधर्म समभाव’ और विकास के एजेंडे को साथ लेकर चलेगी। पटना साहिब में उन्हें गुरु महाराज से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियां भी दी गईं, जिसे उन्होंने बड़े चाव से सुना। समर्थकों का भारी हुजूम यह बताने के लिए काफी था कि बिहार के नए ‘सम्राट’ से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।

आस्था और राजनीति का यह संगम बिहार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। गुरु के चरणों में मत्था टेकने के बाद अब सम्राट चौधरी के सामने चुनौती है विकास की उस रफ़्तार को बनाए रखने की, जिसका वादा उन्होंने किया है। विकसित बिहार के इस संकल्प में गुरु महाराज का आशीर्वाद उन्हें कितनी शक्ति देता है, यह आने वाला वक्त बताएगा।

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