विजय कुमार चौधरी बने बिहार के नए उपमुख्यमंत्री, पद और गोपनीयता की ली शपथ
बिहार की सियासत में जब शोर-शराबे से दूर, शांत रहकर बड़े फैसले लेने की बात आती है, तो एक ही नाम ज़हन में आता है—विजय कुमार चौधरी। समस्तीपुर की मिट्टी से निकले विजय चौधरी ने आज उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कभी स्टेट बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर रहे विजय चौधरी ने करीब 40 साल पहले अपनी सुरक्षित नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दी थी ताकि वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभाल सकें।
8 जनवरी 1957 को जन्मे विजय कुमार चौधरी का राजनीति से नाता विरासत का था। उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। विजय चौधरी खुद एक मेधावी छात्र थे और उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में बतौर प्रोबेशनरी ऑफिसर अपना करियर शुरू किया था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 1982 में पिता के अचानक निधन ने उन्हें बैंक की फाइलों से निकालकर जनता के बीच खड़ा कर दिया। उन्होंने अपनी सुरक्षित नौकरी से इस्तीफा दिया और 1982 के उपचुनाव में दलसिंहसराय से जीतकर विधानसभा पहुंचे। यह एक ऐसे सफर का आगाज़ था जिसे आने वाले दशकों में बिहार की सत्ता का केंद्र बनना था।
विजय चौधरी का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। 1995 और 2000 के विधानसभा चुनावों में मिली हार ने उनके सियासी करियर पर सवालिया निशान लगा दिए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2005 में उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू का दामन थामा और यहीं से उनकी ‘दूसरी पारी’ शुरू हुई। नीतीश कुमार ने उनकी प्रशासनिक पकड़ और सौम्य स्वभाव को पहचाना। विजय चौधरी जल्द ही नीतीश के ‘कोर ग्रुप’ का हिस्सा बन गए। पार्टी में महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष जैसे पदों को संभालने के बाद, वे 2010 से सरायरंजन क्षेत्र की आवाज़ बने हुए हैं। 2025 के हालिया चुनावों में भी उन्होंने 20 हज़ार से ज़्यादा वोटों से जीतकर अपनी लोकप्रियता पर मुहर लगा दी है।
विजय चौधरी बिहार के उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जिन्होंने लगभग हर महत्वपूर्ण विभाग को संभाला है। चाहे वह जल संसाधन हो, वित्त हो, शिक्षा हो या ग्रामीण विकास। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका की सराहना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने की। उनकी सबसे बड़ी खूबी है ‘बिना शोर-शराबे के काम करना’। नीतीश कुमार के लिए वे हमेशा एक ऐसे ढाल की तरह रहे, जिन्होंने बड़े से बड़े सियासी तूफान को अपनी वाकपटुता और संयम से शांत कर दिया। अब उपमुख्यमंत्री के रूप में उनका अनुभव सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को मजबूती प्रदान करेगा।
विजय कुमार चौधरी का उपमुख्यमंत्री बनना यह संदेश देता है कि राजनीति में सिर्फ शोर मचाने वाले ही आगे नहीं बढ़ते, बल्कि धैर्य और निष्ठा से काम करने वाले भी शिखर तक पहुंचते हैं।
