मंत्री विजय चौधरी का संकेत, “मीडिया की रेस में दौड़ने वाला चेहरा ही होगा अगला सीएम”
Image Source: Vijay Choudhary (Social Media)
बिहार की राजनीति आज उस दहलीज पर खड़ी है, जहाँ से पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं है। पिछले दो दशकों से बिहार की धुरी रहे नीतीश कुमार अब पटना की गलियों से निकलकर दिल्ली के राज्यसभा की ओर कूच करने को तैयार हैं। लेकिन उनके जाने से पहले सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार की गद्दी का वारिस कौन होगा? कैबिनेट मंत्री और नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद नेता विजय चौधरी ने इस पूरे घटनाक्रम का ‘मिनट-टू-मिनट’ शेड्यूल जारी कर दिया है। उनके एक छोटे से वाक्य ने बिहार के सियासी गलियारों में वो हलचल मचा दी है, जो शायद आने वाले कई सालों तक शांत नहीं होगी।
बिहार में ‘सत्ता के हस्तांतरण’ की पटकथा अब पूरी तरह से लिखी जा चुकी है। वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी ने आज मीडिया के सामने आकर उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया, जो पिछले कई हफ्तों से चर्चा का विषय बनी हुई थीं। विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि— ‘मुख्यमंत्री जी 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए दिल्ली जाएंगे। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और जैसे ही वे शपथ लेंगे, उसके तत्काल बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री पद से अपना विधिवत इस्तीफा महामहिम राज्यपाल को सौंप देंगे।‘ विजय चौधरी के इस बयान का मतलब साफ़ है—10 अप्रैल को बिहार में नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री के रूप में अंतिम दिन होगा।
पूरी रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब पत्रकारों ने विजय चौधरी से सीधे तौर पर नए मुख्यमंत्री के नाम का खुलासा करने को कहा। विजय चौधरी ने अपने पुराने ‘सियासी अंदाज़’ में मुस्कुराते हुए कहा— ‘अरे भाई, जरा स्थिर होकर पूछिए। जिन-जिन लोगों को मुख्यमंत्री की रेस में मीडिया सबसे आगे दिखा रही है, वही होंगे।‘ उनके इस एक वाक्य ने बिहार की राजनीति में ‘स्पष्टता’ का संदेश दे दिया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो ‘मुख्यमंत्री की रेस’ में केवल एक ही नाम सबसे ऊपर रहा है, और वह है— सम्राट चौधरी। पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार ने अपनी हर सार्वजनिक यात्रा और सरकारी कार्यक्रमों में सम्राट चौधरी को जिस तरह से तरजीह दी है, वह इस ओर साफ़ इशारा था कि वे अब कमान बीजेपी के हाथों में सौंपने को तैयार हैं।
लेकिन बिहार की यह सत्ता बदली इतनी आसान भी नहीं होने वाली। भले ही विजय चौधरी ने संकेतों में सम्राट चौधरी का नाम ले लिया हो, लेकिन गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे सहयोगियों की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं। वहीं, जेडीयू के भीतर भी ‘निशांत कुमार’ के समर्थकों ने अपनी आवाज़ उठानी शुरू कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश कुमार का केंद्र में जाना और बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में एक ‘ऐतिहासिक शिफ्ट’ है। यह न केवल प्रशासन के तौर-तरीकों को बदलेगा, बल्कि राजद (RJD) के तेजस्वी यादव को भी एक नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर देगा। 10 अप्रैल के बाद बिहार की राजनीति का रंग पूरी तरह से भगवा होने की संभावना है, लेकिन क्या सम्राट चौधरी नीतीश कुमार जैसी सर्वमान्यता हासिल कर पाएंगे? यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
बिहार की राजनीति में अब ‘इंतज़ार’ की घड़ियाँ खत्म होने को हैं। 10 अप्रैल की शपथ और उसके बाद होने वाली एनडीए की बैठक बिहार के अगले 5 सालों का भविष्य तय करेगी। विजय चौधरी के इशारे ने भले ही सम्राट चौधरी के रास्ते की बाधाएं कम कर दी हों, लेकिन राजभवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के बाद ही ‘नया बिहार’ अपनी शक्ल लेगा।
