दिल्ली में आईएचसी के मंच पर नजर आएगी सुपवा, इंडिया हैबिटेट सेंटर (आईएचसी) व डीएलसीसुपवा के बीच हुआ एमओयू

डीएलसीसुपवा व आईएचसी के बीच एमओयू का आदान-प्रदान करते कुलगुरु डॉ अमित आर्य व निदेशक प्रो (डॉ) केजी सुरेश

रोहतक: दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के छात्र अब नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित इंडिया हैबिटेट सेंटर (आईएचसी) के मंच पर अपनी प्रस्तुति दे सकेंगे। इसके लिए बुधवार को आईएचसी व डीएलसीसुपवा के बीच एमओयू साइन किया गया। इसका उद्देश्य दोनों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि छात्रों की प्रतिभा को बड़ा मंच प्रदान किया जा सके।

प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर फैकल्टी के सेमीनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डीएलसीसुपवा की ओर से रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा व आईएचसी की तरफ से निदेशक प्रो (डॉ) केजी सुरेश ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान कुलगुरु डॉ अमित आर्य व प्रो सुरेश के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। प्रो सुरेश ने कहा कि एमओयू के बाद सुपवा के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों, कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों को नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे। इसके माध्यम से ज्ञान के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, शोध व रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर को कला, संस्कृति, पर्यावरण, वास्तुकला, सामाजिक विकास व समसामयिक विषयों पर संवाद एवं कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रमुख संस्थान के तौर पर जाना जाता है। जबकि, डीएलसीसुपवा देश का प्रमुख विश्वविद्यालय है, जहां डिजाइन, फिल्म एवं टेलीविजन, विजुअल आर्ट्स व प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर जैसे रचनात्मक विषयों में शिक्षा दी जाती है।

उन्होंने कहा कि आईएचसी व डीएलसीसुपवा के बीच एमओयू कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में आगे चलकर मील का पत्थर साबित होगा। इसके माध्यम से छात्रों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, रचनात्मक कार्यों को व्यापक मंच तक पहुंचाने व कला जगत के विशेषज्ञों से जुड़ने के अवसर मिल सकेंगे। इसके अतिरिक्त, संयुक्त प्रदर्शनियों, व्याख्यानों, कार्यशालाओं व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की दिशा में भी कदम उठाए जा सकेंगे। कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने कहा कि इस साझेदारी से डीएलसीसुपवा के छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। कलाकारों, शिक्षकों और शोधार्थियों के बीच संवाद बढ़ने से नई विचारधाराओं व कलात्मक प्रयोगों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, भारतीय कला, संस्कृति व समकालीन रचनात्मक अभिव्यक्तियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह एमओयू उपयोगी साबित होगा। इस अवसर पर डीन अकादमिक डॉ अजय कौशिक, फैकेल्टी कोऑर्डिनेटर विनय कुमार, महेश टीपी, अजयबाहू जोशी, सभी फैकेल्टी सदस्य, टीचिंग स्टॉफ आदि भी मौजूद रहे।

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