सीनियर एडवोकेट आलोक कुमार ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लिखा पत्र; वृद्धाश्रमों में देहदान की उठाई मांग
कहते हैं कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, और जब बात उन बुजुर्गों की हो जिन्हें समाज ने लावारिस छोड़ दिया, तो उनकी सेवा साक्षात भगवान की पूजा बन जाती है। राजधानी दिल्ली के पास ‘अपना घर’ एक ऐसा ही आश्रम है, जहां सड़क पर पड़े हुए बीमार वृद्ध लोगों को न सिर्फ पनाह मिलती है, बल्कि उनमें प्रभु का रूप देखकर उनकी सेवा की जाती है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कुछ समय पहले खुद वहां जाकर इस सेवा भाव को महसूस किया था।
लेकिन उम्र और गंभीर बीमारियों के कारण इन वृद्धाश्रमों में कई बुजुर्ग दुनिया को अलविदा कह जाते हैं। अब ‘दधीचि देह दान समिति’ के संरक्षक और सीनियर एडवोकेट आलोक कुमार ने मुख्यमंत्री को एक बेहद महत्वपूर्ण लेटर लिखा है। इस लेटर में ‘अपना घर’ और अन्य वृद्धाश्रमों में दिवंगत होने वाले बुजुर्गों के अंगदान और देहदान को लेकर एक बड़ी मांग उठाई गई है, जिसके आड़े फिलहाल पोस्टमॉर्टम की कानूनी मजबूरी आ रही है।
आश्रम के प्रबंधक चाहते हैं कि यहां दिवंगत होने वाले बुजुर्गों के अंग और उनकी पूरी बॉडी को मानवता के लिए दान किया जा सके। इससे जहां एक तरफ अंग की प्रतीक्षा कर रहे गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलेगा, वहीं मेडिकल कॉलेज के छात्रों को पढ़ाई और रिसर्च के लिए ‘कैडेवर’ यानी बॉडी मिल सकेगी, जो उनके लिए एक गुरु की तरह काम करती है।
इस नेक काम में सबसे बड़ी रुकावट यह आ रही है कि ऐसी संस्थाओं में होने वाली मृत्यु के बाद नियमानुसार पोस्टमॉर्टम होना आवश्यक माना जाता है। और पोस्टमॉर्टम के बाद पूरी बॉडी को रिसर्च के लिए दान करना मुमकिन नहीं रह जाता।
लेकिन एडवोकेट आलोक कुमार ने अपने लेटर में कानून के एक बहुत ही व्यावहारिक नियम का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि अगर इलाके के ACP या जिला कलेक्टर शव का मुआयना करने के बाद इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि मौत के पीछे कोई संदिग्ध या अप्राकृतिक कारण नहीं है, तो उनके पास यह पावर होती है कि वे पोस्टमॉर्टम की इस प्रक्रिया को रोक सकते हैं। अगर प्रशासन इस मामले में थोड़ी संवेदनशीलता दिखाए, तो देहदान की राह बेहद आसान हो सकती है।
पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि अगर किन्हीं कानूनी वजहों से पूरी बॉडी का पोस्टमॉर्टम होना जरूरी भी हो, तो भी उससे पहले बुजुर्गों की आँखें (कॉर्निया) बहुत ही सुरक्षित तरीके से दान की जा सकती हैं। जिससे किसी अंधेरी जिंदगी को नई रोशनी मिल सकती है। इसके लिए पोस्टमॉर्टम का इंतजार करने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती। ‘अपना घर’ संस्था ने भी प्रशासन से इसके लिए विशेष प्रार्थना की है ताकि कोई भी अंग बेकार न जाए।
सीनियर एडवोकेट आलोक कुमार द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया यह लेटर सीधे तौर पर सिस्टम और प्रशासन से एक बड़ी अपील है। अगर दिल्ली सरकार और जिला प्रशासन इस पर विचार करके कोई उचित निर्णय लेते हैं, तो कानूनी अड़चनों को दूर करके कई लोगों को एक नई जिंदगी दी जा सकती है।
