नई दिल्ली के IGNCA में 15वें दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का भव्य समापन

सिनेमा की कोई भाषा नहीं होती, यह सरहदों को लांघकर दिलों को जोड़ने का काम करता है। देश की राजधानी नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में कला, कूटनीति और वैश्विक कहानियों का एक बेहद खूबसूरत संगम देखने को मिला। मौका था 15वें दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के ‘पोस्ट-फेस्टिवल अवॉर्ड इवेंट’ का। संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में इस बार 51 देशों की 178 फिल्मों ने हिस्सा लिया।

लेकिन इस बार का सबसे बड़ा सरप्राइज यह रहा कि ईरान, अल्जीरिया, लातविया और बुल्गारिया जैसे देशों की फिल्मों ने अपनी संवेदनशील कहानियों और तकनीकी कौशल से बड़े-बड़े देशों को पीछे छोड़ते हुए मुख्य पुरस्कारों पर कब्जा जमा लिया।

पुरस्कारों के वितरण में शॉर्ट फिल्म सेक्शन के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई चौंकाने वाली प्रतिभाएं सामने आईं। प्रतिभाशाली फिल्म डायरेक्टर यूसुफ बेन घानेम द्वारा निर्देशित अल्जीरियाई शॉर्ट फिल्म ‘दामू की’ ने अपनी गहरी कहानी से सबको हैरान कर दिया, जिसके लिए फिल्म को बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला। इस सम्मान को अल्जीरिया के राजदूत महामहिम अली अचौई और उनकी टीम ने मंच पर ग्रहण किया।

वहीं, डायरेक्टर हुसैन फिरूज़ेह की बहुचर्चित कूर्दिश-फारसी फिल्म ‘हैप्पी एंड’ को बेस्ट शॉर्ट फिल्म का अवार्ड मिला, जिसे ईरानी दूतावास के द्वितीय सचिव मिस्टर ओमिद बाबेलियन ने स्वीकार किया। इसके साथ ही, हिंदी शॉर्ट फिल्म ‘गैया’ के लिए डायरेक्टर अभय कपूर के बेहतरीन काम को भी खूब सराहा गया, जिन्हें IGNCA के मीडिया कंट्रोलर अनुराग पुनेठा की मौजूदगी में विशेष प्रोत्साहन मिला।

अंतरराष्ट्रीय और भारतीय सिनेमा पुरस्कार खंड में भी लातविया और बुल्गारिया के सिनेमा ने विशेष रूप से ध्यान खींचा। लातवियाई फिल्म ‘लिटिल अन्ना’ ने अपने बेहतरीन सामाजिक सरोकार से हर किसी को हैरान किया और इसके लिए डायरेक्टर उल्डिस गेब्रियल सिप्सट्स को बेस्ट सोशल फिल्म का अवार्ड मिला, जिसे लातविया दूतावास की चार्ज डी अफेयर्स सुश्री इंगा स्क्रूज़माने ने ग्रहण किया। बुल्गारियाई सिनेमा ने अपनी विविधता और तकनीकी कौशल से सबको चौंकाते हुए दो बड़ी ट्रॉफियां अपने नाम कीं, जिसमें महामहिम राजदूत निकोले यानकोव की मौजूदगी में ‘टू पुट इट माइल्डली’ को बेस्ट एनीमेशन फिल्म और ‘अन्ना’ को बेस्ट फीचर फिल्म वर्ल्ड सिनेमा का मुख्य सम्मान मिला।

इसके अलावा, बांग्लादेश की फिल्म ‘मानुषेर बागान’ के लिए डायरेक्टर नूरुल आलम अतीक को बेस्ट फीचर सोशल सब्जेक्ट का अवार्ड मिला। रूसी फिल्मों का भी दबदबा रहा, जिसमें ‘हॉर्न एंड आइवरी’ के लिए डारिया गवरुशिनो को बेस्ट रशियन एक्ट्रेस का अवार्ड दिया गया और इलियास दाउदी निर्देशित फिल्म ‘The Blind’ को जूरी चॉइस अवार्ड मिला। वहीं स्लोवाकिया के डायरेक्टर इवो ट्रैजकोव की फिल्म ‘The Ballad of Piargy’ को बेस्ट हिस्टोरिकल फीचर फिल्म का अवार्ड मिला।

भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा के अंतर्गत उत्तराखंड की गढ़वाली फिल्म ‘घंगटौल’ का जलवा रहा, जिसके लिए सुशीला रावत को बेस्ट वीमेन डायरेक्टर का गौरवशाली सम्मान अल्जीरिया के राजदूत महामहिम अली अचौई की उपस्थिति में प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त भारत के म्यूजिक वीडियो ‘लैंड ऑफ अदर्स’ को भी सम्मानित किया गया, और मलयालम फिल्म ‘जंगर’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का पुरस्कार दिया गया।

समारोह में प्रख्यात कलाकार और चितकारा यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स विभाग के डीन व हेड डॉ. रंजन मलिक को उनकी कलात्मक सेवाओं के लिए मंच पर विशेष रूप से सम्मानित करते हुए DIFF आर्ट शो सर्टिफिकेशन और ट्रॉफी से नवाजा गया। समारोह के सांस्कृतिक पड़ाव पर डॉ. सुशील जैन और गुरविंदर गल्लू ने मेंडोलिन पर एक बेहद सुरीली जुगलबंदी पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DIFF) की स्थापना प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और लेखक रामकिशोर पारचा ने की थी। समारोह की शुरुआत में मंच पर मौजूद सभी वैश्विक राजदूतों की मौजूदगी में राम किशोर पारचा द्वारा रचित कविता संग्रह (Trilogy Poetry Collection) का भव्य विमोचन किया गया, जिसमें ‘तुम’, ‘बर्फ़ पर तितली’ और ‘तुम्हारा नाम नदी’ नामक तीन प्रमुख संकलन शामिल हैं। इसके तुरंत बाद, फेस्टिवल को पर्दे के पीछे रहकर सफल बनाने वाली कर्मठ कोर टीम के सदस्यों के लिए मेडल डिस्ट्रीब्यूशन सेरेमनी का आयोजन किया गया, जिसमें चीनी डेलिगेशन के हाथों राजन झांजी, प्रमोद कौंसवाल, उषा पाहवा, अनिश्का किशोर, आराध्या, राजीव रंजन, प्रशांत, मानवेंद्र और नरेंद्र सिंह को पदक देकर सम्मानित किया गया।

समापन सत्र में फेस्टिवल के संस्थापक रामकिशोर पारचा ने न्यूजीलैंड के डिप्टी हाई कमिश्नर मैथ्यू आयर्स, स्विट्जरलैंड के चार्ज डी अफेयर्स साइमन सेवान शेफर, उत्तर कोरियाई दूतावास के काउंसलर जांग जोंग ह्वान सहित जूरी सदस्यों अरविंद गौड़ और ओ.पी. मिश्रा का धन्यवाद किया। अंत में, संस्कृति मंत्रालय और IGNCA के चेयरमैन राम बहादुर राय, सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी सहित सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया और पुरस्कार विजेता गढ़वाली फीचर फिल्म ‘घंगटौल’ की विशेष क्लोजिंग स्क्रीनिंग के साथ शो का समापन हुआ।

15वें दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल्ली वैश्विक सिनेमा का एक मजबूत केंद्र बनती जा रही है। अगर आप इस बार इस महोत्सव का हिस्सा नहीं बन पाए, तो उदास मत होइए। मेकर्स ने अगले साल के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है। अगले साल यह फेस्टिवल 15 से 19 फरवरी तक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित किया जाएगा।

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