तेज प्रताप यादव और प्रशांत किशोर की अचानक मुलाकात, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

बिहार की राजनीति में कहते हैं कि यहाँ कब, कौन, किसके साथ हाथ मिला ले, इसका अंदाजा बड़े-बड़े धुरंधर भी नहीं लगा पाते। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही विपक्ष ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली खबर आई है तेज प्रताप यादव के घर से। जेजेडी के तेज प्रताप और जन सुराज के प्रशांत किशोर—जो एक-दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे—आज हाथ मिलाते नजर आए। तेज प्रताप ने खुद इस मुलाकात को ‘भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला’ बताया है।

तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने लिखा कि यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें जनहित और भविष्य की राजनीति को लेकर गहन चर्चा हुई। तेज प्रताप ने ‘सकारात्मक सोच’ और ‘बदलते राजनीतिक समीकरणों’ का जिक्र कर यह साफ कर दिया है कि वे अब राजनीति के एक नए अनुभव की ओर बढ़ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो प्रशांत किशोर कल तक लालू परिवार पर हमलावर रहते थे, आज वे तेज प्रताप के साथ भविष्य की रणनीति बनाते दिख रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को कई चश्मों से देख रहे हैं। एक ओर प्रशांत किशोर बिहार में ‘जन सुराज’ के जरिए अपना आधार मजबूत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर तेज प्रताप यादव अपनी ‘जनशक्ति जनता दल’ के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुटे हैं। जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी के रूप में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ये दोनों युवा नेता किसी नए ‘तीसरे मोर्चे’ या गुप्त गठबंधन की नींव रख सकते हैं। हालांकि, जेजेडी और जन सुराज के बीच की वैचारिक खाई को पाटना इतना आसान नहीं होगा, लेकिन राजनीति में ‘संभावनाओं’ के द्वार हमेशा खुले रहते हैं।

इस मुलाकात ने आरजेडी के भीतर भी नई चर्चा छेड़ दी है। क्या तेज प्रताप यादव अपने भाई तेजस्वी यादव से अलग अपनी एक नई राजनीतिक लाइन खींच रहे हैं? या फिर यह बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की कोई सोची-समझी रणनीति है? सम्राट चौधरी जिस तरह से ‘एक्शन मोड’ में काम कर रहे हैं, उसने विपक्ष को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति और तेज प्रताप का जनसमर्थन अगर एक साथ आता है, तो बिहार की जंग बेहद रोचक हो जाएगी।

तेज प्रताप और प्रशांत किशोर की इस मुलाकात ने सत्ता पक्ष की चिंताएं जरूर बढ़ा दी होंगी। फिलहाल किसी आधिकारिक गठबंधन की घोषणा तो नहीं हुई है, लेकिन ‘राजनीति की दिशा तय करने’ वाले इस संवाद ने संकेत दे दिया है कि बिहार में अभी कई बड़े उलटफेर होने बाकी हैं।

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