खुद पर आरोप न लगे इसलिए नीतीश ने पुत्र को संगठन तक सीमित रखा, संजय झा ने दिलाई थी सदस्यता
बिहार की सत्ता में ‘सम्राट’ का राजतिलक तो हो गया, लेकिन राजभवन के मंच पर एक चेहरे की कमी ने सबको चौंका दिया था। चर्चा थी कि नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बन सकते हैं, लेकिन जब शपथ ग्रहण की सूची आई तो उनका नाम गायब था। जेडीयू की ओर से दो पुराने दिग्गजों—विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ने कमान संभाली।
राजनीतिक गलियारों में यह लगभग तय माना जा रहा था कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद निशांत कुमार सत्ता के केंद्र में होंगे। सूत्रों के मुताबिक, निशांत पार्टी में शामिल होने के लिए तो मान गए, लेकिन उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करने को लेकर वे तैयार नहीं थे। जेडीयू के कई वरिष्ठ नेताओं ने आखिरी वक्त तक उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन निशांत ने साफ़ कर दिया कि वे फिलहाल संगठन के लिए काम करना चाहते हैं। जानकारों का कहना है कि निशांत ने अपने पिता नीतीश कुमार से यह भी कहा था कि इस्तीफा कुछ महीनों के लिए टाल दिया जाए, ताकि वे खुद को तैयार कर सकें, लेकिन नीतीश फैसला ले चुके थे।
नीतीश कुमार, जो खुद को लोहिया और कर्पूरी ठाकुर का सच्चा शिष्य मानते हैं, अपने 21 साल के बेदाग राजनीतिक करियर पर ‘परिवारवाद’ का ठप्पा नहीं लगने देना चाहते थे। यही वजह रही कि जब निशांत पार्टी में शामिल हुए, तब नीतीश जेडीयू दफ्तर में मौजूद नहीं थे। वे चाहते हैं कि निशांत पहले पार्टी की बारीकियों को समझें और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी जगह बनाएं। सूत्रों का कहना है कि नीतीश की मंशा निशांत को सीधे सत्ता सौंपने के बजाय उन्हें विधान परिषद (MLC) के रास्ते राजनीति के गुर सिखाने की है। जल्द ही निशांत बिहार के दौरे पर भी निकल सकते हैं।
शपथ लेने के बाद नए उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी निशांत को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि निशांत को पार्टी के साथ-साथ सरकार में भी आना चाहिए, लेकिन यह फैसला खुद निशांत को करना है। फिलहाल यह तय है कि निशांत जेडीयू के संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे। लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है—क्या आने वाले समय में सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में निशांत कुमार को जगह मिलेगी? या फिर नीतीश कुमार अपने पुत्र को 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए एक ‘फ्रेश फेस’ के तौर पर तैयार कर रहे हैं?
बिहार की राजनीति में अब ‘निशांत’ की चुप्पी भी बहुत कुछ कह रही है। एक ओर बीजेपी के सम्राट का उदय हुआ है, तो दूसरी ओर जेडीयू की नई पीढ़ी ने दस्तक दे दी है। अब देखना होगा की क्या निशांत कुमार भविष्य के ‘गेम चेंजर’ साबित होंगे?
