नीतीश कुमार ने ली राज्यसभा सदस्य की शपथ, सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने पद और गोपनीयता की दिलाई शपथ
बिहार की राजनीति के लिए आज एक ऐतिहासिक बदलाव का दिन साबित हुआ। दो दशकों तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार अब ‘माननीय राज्यसभा सांसद’ बन गए हैं। दोपहर करीब सवा 12 बजे संसद भवन में उन्होंने शपथ ली, और इसी के साथ उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की घड़ी करीब आ गई है। अब सवाल यह है कि नीतीश के बाद बिहार का नया ‘सुल्तान’ कौन होगा? क्या पटना में राजतिलक की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं?
शुक्रवार दोपहर 12:15 बजे, यह वह समय था जब बिहार की राजनीति का भूगोल बदल गया। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने नीतीश कुमार को शपथ दिलाई। अपने लंबे और बेमिसाल राजनीतिक करियर में नीतीश कुमार पहली बार उच्च सदन यानी राज्यसभा के सदस्य बने हैं। राजनीतिक गलियारों में इस शपथ को बिहार की सत्ता से नीतीश की सम्मानजनक विदाई और केंद्र की राजनीति में एक बड़ी ‘रणनीतिक एंट्री’ के तौर पर देखा जा रहा है। शपथ ग्रहण के दौरान नीतीश कुमार के चेहरे की गंभीरता साफ़ बता रही थी कि वे एक बड़ी जिम्मेदारी की ओर कदम बढ़ा चुके हैं।
शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबकी नज़रें नीतीश कुमार के पटना लौटने पर टिकी हैं। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार जल्द ही राजभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंपेंगे। उनके इस्तीफे के साथ ही मौजूदा कैबिनेट भंग हो जाएगी और बिहार में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ़ होगा। पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों को बल मिल रहा है कि इस बार बिहार की कमान बीजेपी के हाथ में जा सकती है। सम्राट चौधरी का नाम रेस में सबसे आगे है, लेकिन जेडीयू कार्यकर्ताओं की ‘निशांत कुमार’ वाली मांग ने भी माहौल को सस्पेंस से भर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना महज़ एक पद का बदलाव नहीं है। 75 साल की उम्र में उनका राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख करना संकेत देता है कि वे केंद्र सरकार में किसी अहम भूमिका या एनडीए के भीतर किसी बड़े रणनीतिक पद को संभाल सकते हैं। बिहार की बागडोर अपने उत्तराधिकारी को सौंपकर नीतीश खुद को दिल्ली की बिसात पर एक ‘किंगमेकर’ या ‘मार्गदर्शक’ के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। हालांकि, बिहार की जनता के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके जाने के बाद ‘सुशासन’ की विरासत को कौन आगे ले जाता है।
नीतीश कुमार का राज्यसभा सांसद बनना बिहार के लिए एक ‘ट्रांजिशन फेज’ है। अब से कुछ ही घंटों में पटना में इस्तीफे और नई सरकार के दावे की हलचल शुरू हो जाएगी। क्या बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने में सफल होगी या जेडीयू कोई नया खेला करेगी?
