दिल्ली सिनेमा की नई राजधानी बनने की ओर: IFFD 2026 का भव्य आगाज़
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दिल्ली हमेशा से ही इतिहास, राजनीति और संस्कृति का केंद्र रही है। लुटियंस दिल्ली की चौड़ी सड़कें, चांदनी चौक की रौनक और पुरानी दिल्ली की संकरी गलियाँ-हर कोने में अनगिनत कहानियाँ बसी हैं। अब राजधानी ने इस रिश्ते को और गहरा कर दिया है। 25 से 31 मार्च 2026 तक दिल्ली सरकार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कला-संस्कृति विभाग की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत International Film Festival Delhi (IFFD) 2026 का आयोजन पूरा हो चुका है। भारत मंडपम सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर चले इस महोत्सव ने इतिहास रचा है।
यह महोत्सव केवल फिल्में दिखाने तक सीमित नहीं था। यह दिल्ली को वैश्विक सिनेमा का केंद्र बनाने का सशक्त प्रयास था। देश-विदेश के अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और फिल्म प्रेमी एक मंच पर आए। इससे फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिला और दिल्ली का पर्यटन भी नई ऊँचाइयों को छूने लगा। IFFD 2026 दिल्ली फिल्म पॉलिसी का प्रमुख हिस्सा साबित हुआ, जिसने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी।
उद्घाटन समारोह: लाल कालीन पर सितारों की बारिश
25 मार्च 2026 को भारत मंडपम में लाल कालीन बिछाई गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उत्सव का उद्घाटन किया। समारोह में हेमामालिनी, शर्मिला टैगोर, कंगना रानौत, अर्जुन कपूर, निमरत कौर, विक्की कौशल, भूमि पेडनेकर जैसी कई हस्तियाँ मौजूद रहीं। उद्घाटन फिल्म ‘सिरात’ (Sirât) की स्क्रीनिंग के साथ शुरू हुआ।
धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर और नंदमूरी बालकृष्ण को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से नवाजा गया। अर्जुन कपूर और निमरत कौर ने मेजबानी की। इस उद्घाटन ने दिल्ली को सिनेमाई चमक से भर दिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “सिनेमा भाषा और सीमाओं से परे लोगों को जोड़ता है। इस उत्सव के माध्यम से दिल्ली मुंबई, पुणे और गोवा के साथ कदम मिलाकर चलना चाहती है।”
कला, संस्कृति और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे ‘ऐतिहासिक पहल’ बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली अब सिर्फ प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि रचनात्मकता का केंद्र बन रही है।
विविध फिल्में और स्क्रीनिंग: 47 देशों की 140+ फिल्में
IFFD 2026 में 47 देशों की 140 से अधिक फिल्में दिखाई गईं। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्में, एनिमेशन और हाइब्रिड फॉर्मेट शामिल थे। स्क्रीनिंग भारत मंडपम, पीवीआर-आईनॉक्स थिएटर, पब्लिक स्पेस, आउटडोर लोकेशन और मोबाइल एलईडी यूनिट्स पर हुई।
सभी कार्यक्रम मुफ्त थे, लेकिन जगह की सीमा के कारण पहले से रजिस्ट्रेशन जरूरी था। असम की फिल्में जैसे ‘मोरोमोर देउता’, ‘गनाराग’ आदि चयनित हुईं, जिससे क्षेत्रीय सिनेमा को विशेष बढ़ावा मिला। उत्सव के दौरान ‘धुरंधर 2’ जैसी फिल्मों की स्क्रीनिंग ने भी खास ध्यान खींचा।
मुख्य आकर्षण: CineXchange से लेकर क्लासिक फिल्मों तक
उत्सव के मुख्य आकर्षण कई रहे:
- CineXchange: फिल्म मार्केट जहां फिल्मकारों ने अपनी परियोजनाएँ पिच कीं और कई डील्स हुईं।
- मास्टरक्लास और पैनल चर्चाएँ: मनोज बाजपेयी, अनुपम खेर, बोमन ईरानी, इम्तियाज अली, शेखर कपूर, राकेश ओमप्रकाश मेहरा, भूमि पेडनेकर जैसी हस्तियाँ शामिल हुईं। ये सत्र नए फिल्मकारों और युवा प्रतिभाओं के लिए ज्ञान का खजाना साबित हुए।
- क्लासिक फिल्में: गुरु दत्त की जन्म शताब्दी पर ‘प्यासा’ की 4K रिस्टोर्ड वर्जन सहित कई पुरानी फिल्में दिखाई गईं। ‘शोले’ की रिस्टोर्ड प्रिंट भी स्क्रीन पर लौटी।
- महिला फिल्मकारों पर फोकस: ‘Her Lens’ जैसी पहल से महिलाओं की फिल्मों को विशेष जगह मिली।
- सांस्कृतिक संध्या: सोनम कालरा, अशीष विद्यार्थी, रिकी केज जैसी कलाकारों के कार्यक्रमों ने दर्शकों को मनोरंजन का दोहरा मजा दिया।
ये आकर्षण उत्सव को सिर्फ फिल्म स्क्रीनिंग से ऊपर उठाकर एक पूर्ण सिनेमाई अनुभव बना गए।
आरंभिक चुनौतियाँ और त्वरित सुधार
उत्सव के पहले दिन कुछ कमियों—जैसे रजिस्ट्रेशन, सीटिंग और तकनीकी मुद्दों-की बात सामने आई। अगले 24 घंटे में सुधार पर काम शुरू हो गया। आलोचकों के निशाने पर Wizcraft की भूमिका रही और आलोचनाओं को सकारात्मक रूप से स्वीकार कर जल्दी सुधार किए गए। कई लोगों ने बताया कि दो दिनों में ही सुधार दिखने लगा।
अच्छे नेतृत्व की पहचान यही है कि आम आदमी की आवाज सुनी जाए। दिल्ली सरकार ने इसे साबित किया। बड़े आयोजन में दो-चार कमियाँ स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें जल्द ठीक करने का प्रयास सराहनीय रहा।
आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव: दिल्ली का नया परिचय
यह उत्सव दिल्ली फिल्म पॉलिसी का हिस्सा साबित हुआ। इससे स्थानीय व्यवसायों, होटलों, परिवहन और पर्यटन को अच्छा फायदा हुआ। फिल्मकारों, आलोचकों और दर्शकों की भारी आमद से दिल्ली एनसीआर की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली। नए फिल्मकारों और युवा प्रतिभाओं को मंच मिला, जिससे स्थानीय कहानियाँ वैश्विक स्तर पर पहुँचीं।
दिल्ली लंबे समय से राजनीति का केंद्र रही है। अब वह कला और संस्कृति का भी केंद्र बनने की राह पर आगे बढ़ चुकी है। IFFD 2026 के सफल समापन से दिल्ली मुंबई और गोवा जैसी फिल्म नगरीयों के साथ कदमताल करने लगी है। कला मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे “देश के लिए एक शानदार शुरुआत” बताया।
भविष्य की दिशा: हर साल और भव्य
अब इस पर कोई बहस नहीं बची कि IFFD 2026 भारत के बेहतरीन फिल्म महोत्सवों में शुमार हो चुका है। भविष्य में गुणवत्ता पर और काम करने की जरूरत है-आंतरिक तैयारी को और मजबूत करना, दर्शकों की संख्या बढ़ाना, तकनीकी गड़बड़ियों पर पूर्ण नियंत्रण और कार्यक्रमों को और आकर्षक बनाना। यह सब बचे हुए काम हैं।
यह आयोजन अब हर साल होने जा रहा है। पहली बार की गलतियों से सबक लेकर अगली बार इन्हें दोहराया नहीं जाएगा। दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को बेहतर समन्वय से काम करना होगा।
एक सपने की साकार शुरुआत
IFFD 2026 दिल्ली के लिए सिर्फ एक फिल्म उत्सव नहीं, बल्कि एक सपने की साकार शुरुआत साबित हुआ। फिल्मी चमक, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटकों की भीड़ से राजधानी सिनेमाई धमाके का गवाह बनी। यह उत्सव हर साल और भव्य रूप लेगा। दिल्ली को विश्व स्तर का फिल्म केंद्र बनाने की गाड़ी अब एक्सप्रेसवे (द्रुतमार्ग) पर सरपट भाग रही है।
दिल्ली वाले मिलकर इसे और सफल बनाने में अपना योगदान देते रहें। दिल्ली अब सिनेमा की नई राजधानी बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है। लाइट्स, कैमरा, एक्शन-दिल्ली तैयार है और आगे भी तैयार रहेगी!
लेखक:- आशीष कुमार ‘अंशु’

