तेजस्वी का हमला: नीतीश कुमार का इस्तीफा बीजेपी की साजिश, दबाव में लिया गया राज्यसभा जाने का फैसला

File Photo: Tejashwi Yadav

पटना: बिहार की राजनीति में जिस ‘खेला’ की बात महीनों से हो रही थी, क्या वो अब अपने अंतिम पड़ाव पर है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी है और वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। लेकिन विपक्षी खेमे के सेनापति तेजस्वी यादव इसे ‘ठगी का खेल’ बता रहे हैं। तेजस्वी का दावा है कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को मजबूर किया है और बिहार की जनता के साथ विश्वासघात किया है।

नीतीश कुमार के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि— ‘तकनीकि रूप से एक सदन से इस्तीफा देना जरूरी है, लेकिन सच ये है की ये निर्णय नीतीश जी की मर्जी से नहीं बल्कि भारी दबाव में लिया गया है।‘ तेजस्वी ने याद दिलाया कि वे शुरू से कह रहे थे कि अगर एनडीए की सरकार बनी, तो बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर टिकने नहीं देगी। तेजस्वी के मुताबिक, आज उनकी वो भविष्यवाणी सच साबित हो रही है और नीतीश कुमार को किनारे लगाया जा रहा है।

तेजस्वी यादव ने सिर्फ नीतीश कुमार के इस्तीफे पर ही नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली पर भी जमकर प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए ने बिहार की जनता और खासकर महिलाओं को ‘ठगा’ है। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि— ‘चुनाव के वक्त 10 हजार रुपए देकर जो 2 लाख रुपए का जो वादा किया गया था, वो पैसे कब मिलेंगे?’ उन्होंने बिजली की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 125 यूनिट फ्री बिजली का वादा करने वालों के राज में बिहार में सबसे महंगी बिजली मिल रही है। तेजस्वी ने इसे ‘ठगों की सरकार’ करार दिया।

महंगाई के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए तेजस्वी ने एक नई चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि— ‘जैसे ही बंगाल और केरल का चुनाव खत्म होगा, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी।‘ तेजस्वी का आरोप है कि सरकार केवल चुनाव जीतने के लिए ठगी का सहारा लेती है और बाद में जनता की जेब पर डाका डालती है। उन्होंने साफ़ किया कि जो लोग अपने (नीतीश कुमार) को ठग सकते हैं, वे बिहार की 14 करोड़ जनता का क्या हाल करेंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

तेजस्वी यादव के इन आरोपों ने बिहार की राजनीति के ‘पारे’ को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। क्या नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना वाकई बीजेपी की कोई बड़ी रणनीति है? और क्या तेजस्वी का ये ‘ठगी’ वाला नैरेटिव जनता के बीच असर करेगा? 30 मार्च की ये शाम बिहार के भविष्य के लिए कई बड़े सवाल छोड़ गई है।

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