दिल्ली प्रोटेस्ट से लेकर नेपाल तक… आखिर क्यों Gen-Z प्रोटेस्ट का नया सिंबल बना एनीमे ‘वन पीस’ का खोपड़ी वाला झंडा?
नई दिल्ली: राजनीति और विरोध प्रदर्शनों की दुनिया में कब कौन सा सिंबल ट्रेंड बन जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इन दिनों दिल्ली के प्रोटेस्ट को लेकर चर्चा में आईं AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा एक खास वजह से सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। प्रदर्शन के दौरान उनकी पहनी हुई एक टी-शर्ट लोगों का ध्यान खींच रही है—जिस पर खोपड़ी और उसके नीचे ‘वन पीस’ लिखा हुआ है। आखिर यह सिर्फ एक एनीमे का निशान है या इसके पीछे कोई बड़ा क्रांतिकारी संदेश छिपा है?
सबसे पहले बात करते हैं इस खोपड़ी वाले निशान के इतिहास की। इतिहास में खोपड़ी और हड्डियों वाले डिजाइन के शुरुआती रिकॉर्ड 17वीं सदी के आखिर में मिलते हैं। साल 1700 के आसपास समुद्री डाकू इमैनुएल विन के झंडे पर खोपड़ी और हड्डियों का डिजाइन दर्ज किया गया था। उस दौर में समुद्री लुटेरे अलग-अलग झंडों का इस्तेमाल करते थे—काला झंडा सामने वाले जहाज को डराकर आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने का संकेत होता था, जबकि लाल झंडा ज्यादा घातक इरादे को दिखाता था। यानी यह निशान सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि समुद्र में दूर से दिया जाने वाला एक मनोवैज्ञानिक संदेश था कि लड़ना है या आत्मसमर्पण करना है।
लेकिन इस पुराने सिंबल को आज की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z के बीच ग्लोबल पहचान दिलाई है जापानी मंगा आर्टिस्ट इचिरो ओडा ने, जिन्होंने 1997 में ‘वन पीस’ नाम की मंगा सीरीज शुरू की थी। समुद्री लुटेरों की दुनिया पर आधारित इस कहानी का मुख्य किरदार है मंकी डी. लूफी, जिसका सपना दुनिया का सबसे बड़ा पाइरेट किंग बनना है। ‘स्ट्रॉ हैट पाइरेट्स’ के नाम से जाना जाने वाला यह ग्रुप दमनकारी शासकों के खिलाफ खड़ा होता है, आम लोगों की मदद करता है और तानाशाही व्यवस्था को चुनौती देता है। धीरे-धीरे यह सिंबल आजादी, विद्रोह और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की एक इंटरनेशनल पॉप-कल्चर भाषा बन गया।

यह सिर्फ किताबों या स्क्रीन्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों पर भी इसका असर दिखा है। पड़ोसी देश नेपाल में Gen-Z के प्रदर्शनों के दौरान यही ‘वन पीस’ का झंडा प्रमुखता से नजर आया था। सरकार के खिलाफ शुरू हुआ वह आंदोलन इतना उग्र हुआ कि तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को आखिरकार इस्तीफा देना पड़ा था।
कुछ ऐसा ही नजारा इंडोनेशिया में भी देखने को मिला, जहां 2025 के दौरान ट्रक ड्राइवरों और युवाओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी असहमति जताने के लिए इसी झंडे और निशान को अपना हथियार बनाया।
अब यही ग्लोबल सिंबल भारत की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुका है। 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान जब AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा इसी डिजाइन वाली टी-शर्ट में नजर आईं, तो सोशल मीडिया पर इसके मायने तलाशे जाने लगे।
चाहे पुलिस की कार्रवाई हो या सत्ता के खिलाफ आवाज उठाना, युवा पीढ़ी अब अपनी असहमति जताने के लिए इस पॉप-कल्चर आइकन का खुलकर इस्तेमाल कर रही है। एनीमे की दुनिया से निकलकर सड़कों के आंदोलन तक पहुंचने वाला यह ‘वन पीस’ का झंडा आने वाले दिनों में और कौन-कौन से राजनीतिक समीकरणों पर असर डालता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
