“बिहार की बेटियों का सौदा?” BJP पर बरसे तेजस्वी यादव, बोले- इनकी सोच ही विषैली है
बिहार की राजनीति से लंबे समय से गायब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने साल 2026 के आगाज़ के साथ ही अपनी चुप्पी तोड़ दी है। और यह वापसी किसी धमाके से कम नहीं है। मुद्दा है उत्तराखंड की एक मंत्री के पति का वो विवादित बयान, जिसने बिहार की बेटियों के सम्मान को ठेस पहुँचाई है। तेजस्वी ने न केवल इस बयान पर भाजपा को घेरा है, बल्कि नीतीश सरकार की महिला योजना पर भी करारा तंज कसा है।
करीब एक महीने तक राजनीतिक परिदृश्य से ओझल रहने के बाद तेजस्वी यादव ने ‘X’ पर एक वीडियो शेयर कर बिहार की राजनीति में अपनी सक्रियता का संदेश दे दिया है। तेजस्वी ने उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरिधारी लाल साहू के उस बयान को हथियार बनाया है, जिसमें वे बिहार की लड़कियों को लेकर विवादित टिप्पणी करते सुनाई दे रहे हैं। तेजस्वी ने सीधा हमला बोलते हुए लिखा कि— भाजपाइयों की बिहार और महिलाओं के प्रति सदा से ही ऐसी विषैली सोच रही है
तेजस्वी ने इस विवाद के बहाने बिहार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता यह कह रहे हैं कि 10 हजार रुपये देकर महिलाओं का वोट खरीदने के बाद अब बिहार से 20-25 हजार में लड़कियां ले आएंगे। तेजस्वी का यह बयान सीधे तौर पर आधी आबादी को लामबंद करने और सरकार की योजनाओं की नीयत पर सवाल उठाने की कोशिश है।
इस बयान की आग इतनी तेज है कि बिहार के सत्ताधारी दल—बीजेपी और जदयू भी बचाव की मुद्रा में हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और जदयू अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी इस बयान की निंदा की है। वहीं, बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने इसे अत्यंत निंदनीय बताते हुए मंत्री पति को नोटिस भेजने और बिना शर्त माफी मांगने का आदेश दिया है। कांग्रेस ने भी इसे बिहार के स्वाभिमान से जोड़ते हुए भाजपा को घेरे में ले लिया है।
तेजस्वी यादव की यह एंट्री बताती है कि वे अब बैकफुट पर नहीं रहने वाले। उत्तराखंड के एक नेता के बिगड़े बोल ने तेजस्वी को वो मौका दे दिया है, जिससे वे पूरे प्रदेश में ‘बिहार की अस्मिता’ और ‘नारी सम्मान’ का कार्ड खेल सकें। अब देखना यह है कि भाजपा इस विवाद से खुद को कैसे बचाती है और तेजस्वी की यह सक्रियता आने वाले दिनों में क्या रंग लाती है।
