दिल्ली में ‘शब्दोत्सव’ का धमाका! मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया उद्घाटन, कहा- “जड़ों से जुड़ना ही असली प्रगति”

Source: 'X' account of Delhi Chief Minister Rekha Gupta

दिल्ली: देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली, अब देश की सांस्कृतिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। इंडिया गेट के करीब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आज से तीन दिवसीय ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ का भव्य आगाज़ हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर इस उत्सव की शुरुआत की और इसे भारत की ज्ञान परंपरा का पुनर्जागरण बताया। ‘भारत अभ्युदय’ की थीम पर आधारित इस महोत्सव में देश के 100 से अधिक दिग्गज वक्ता और हज़ारों युवा शामिल हो रहे हैं।

दिल्ली के दिल में आज साहित्य, संस्कृति और विचारों का महाकुंभ उमड़ पड़ा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘दिल्ली शब्दोत्सव’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह उत्सव भारत की उस सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक है, जिसने सदियों के हमलों के बाद भी खुद को सुरक्षित रखा। उन्होंने जोर दिया कि आज के डिजिटल युग में विज्ञान और आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का जीता-जागता उदाहरण बताते हुए घोषणा की कि अब यह शब्दोत्सव हर साल आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि यह केवल किताबों का मेला नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन विरासत का दर्शन है। वहीं, दिल्ली के कला और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने इस आयोजन को बेहद आक्रामक तेवर देते हुए इसे ‘वैचारिक आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली को उन विचारधाराओं से मुक्त करना है जो भारत की जड़ों को कमजोर करती हैं। सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली को दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर सबसे ऊपर स्थापित किया जाए।

महोत्सव के पहले ही दिन 60 हजार से अधिक लोगों की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति को जानने के लिए कितनी उत्सुक है। 100 से अधिक वक्ताओं के साथ संवाद, 40 से अधिक नई पुस्तकों का विमोचन और ओपन माइक जैसे सत्रों ने वैचारिक आदान-प्रदान को एक नया मंच दिया है। समाज कल्याण मंत्री रविंद्र इंद्रजीत सिंह ने भी विभिन्न अकादमियों के स्टॉल का जायजा लिया और इस पहल की सराहना की।

मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में गूंजते ये शब्द और ये सांस्कृतिक रंग बताते हैं कि दिल्ली बदल रही है। ‘शब्दोत्सव’ के जरिए सरकार ने न केवल साहित्य प्रेमियों को एक मंच दिया है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की एक बड़ी मुहिम शुरू की है। 4 जनवरी तक चलने वाला यह उत्सव वैचारिक मंथन का वो केंद्र बनेगा जिसकी गूँज लंबे समय तक सुनाई देगी।

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