‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर बैन की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज को दी हरी झंडी

नई दिल्ली: सिनेमा या सियासत? कला या अपमान? जब भी कोई फिल्म किसी समाज या समुदाय का नाम अपने टाइटल में जोड़ती है, तो विवादों की एक लंबी कतार लग जाती है। मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर छिड़े बवाल की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि ‘यादव जी की लव स्टोरी’ ने नया सियासी और सामाजिक बवंडर खड़ा कर दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, बैन की मांग हुई, लेकिन जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने जो कहा, वह भविष्य के लिए एक मिसाल बन गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि ‘थोड़ा सहनशील बनिए और मोटी चमड़ी रखिए।

बुधवार को जब देश की सबसे बड़ी अदालत में ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर सुनवाई शुरू हुई, तो याचिकाकर्ता ‘विश्व यादव परिषद’ ने दलील दी कि यह फिल्म यादव समाज की प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला रही है। उनका दावा था कि फिल्म का टाइटल आपत्तिजनक है। लेकिन जस्टिस बी वी नागरत्ना की बेंच ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने बहुत ही तार्किक लहजे में कहा कि ‘यादव’ एक सम्मानित समुदाय है और उनके नाम के साथ ‘लव स्टोरी’ जुड़ने से उनकी छवि खराब कैसे हो सकती है? कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी फिल्म के टाइटल को महज इस अंदेशे पर असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता कि वह किसी की इमेज खराब करेगा।

अदालत ने इस मामले की गंभीरता को समझाने के लिए ‘घूसखोर पंडत’ केस का हवाला दिया। बेंच ने समझाया कि कानून की नज़र में दोनों फिल्में अलग हैं। ‘घूसखोर’ शब्द एक नकारात्मक विशेषण है, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जिससे किसी समुदाय विशेष को बुरा लग सकता है। लेकिन ‘यादव जी की लव स्टोरी’ में ऐसा कोई भी शब्द नहीं है जिससे नकारात्मकता (Negative Meaning) झलकती हो। कोर्ट का संदेश साफ था—समाज का नाम लेना अपराध नहीं है, उसे गलत मंशा से पेश करना मुद्दा हो सकता है, जो इस फिल्म के टाइटल में नहीं दिखता।

सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने फिल्म की कहानी, जिसमें एक हिंदू यादव लड़की की शादी मुस्लिम लड़के से दिखाई गई है, उस पर सवाल उठाए, तो जजों ने एक बड़ी नसीहत दी। जस्टिस ने कहा— हैव अ थिक स्किन। थोड़ा सहनशील बनिए। यह एक फिक्शन यानी काल्पनिक कहानी है। आज के दौर में लोग फिल्में थिएटर से ज्यादा मोबाइल पर देख रहे हैं। एक हफ्ते बाद कोई इस फिल्म को याद भी नहीं रखेगा। अदालत ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में कुछ वाकई आहत करने वाला मिलता है, तो कानूनी रास्ते खुले हैं, लेकिन फिलहाल रिलीज पर रोक लगाना संभव नहीं है।

वहीं, इस विवाद के बीच फिल्म की लीड एक्ट्रेस प्रगति तिवारी चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। ‘बिग बॉस 19’ फेम मृदुल तिवारी की बहन प्रगति के लिए यह फिल्म उनके करियर की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है। फिल्म का निर्देशन अंकित भड़ाना ने किया है और यह 27 फरवरी को थिएटर्स में उतरने के लिए तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने अभिव्यक्ति की आजादी को एक नई ढाल दी है। कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि किसी समुदाय की ‘कथित गरिमा’ के नाम पर सिनेमा का गला नहीं घोंटा जा सकता। अब गेंद दर्शकों के पाले में है—क्या ‘यादव जी की लव स्टोरी’ वाकई एक फिक्शन है या फिर सामाजिक विवाद की नई जड़? यह कल साफ हो जाएगा।

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