चिराग पासवान के बढ़ते औरा ने बदली बिहार की सियासत, दही-चूड़ा भोज में राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री तक जुटे

पटना: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति पर इस बार दो बड़े ‘दावत’ की चर्चा रही। एक तरफ तेज प्रताप यादव का भोज था, जहाँ पारिवारिक सुलह की कोशिश दिखी, तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का ‘दही-चूड़ा’ भोज, जिसने सियासी स्ट्राइक रेट के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर बीजेपी के दिग्गजों तक, चिराग के घर पर एनडीए का जो जमावड़ा लगा, उसने विरोधियों के पसीने छुड़ा दिए हैं।

राजधानी पटना में चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज ने उनके बढ़ते राजनीतिक औरा का लोहा मनवा दिया। 19 विधायकों और 6 सांसदों वाली पार्टी के मुखिया चिराग के न्योते पर एनडीए के लगभग सभी घटक दलों के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष पहुँचे। जहाँ राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना इस बात का प्रमाण है कि अब ‘चाचा-भतीजा’ के बीच की कड़वाहट पूरी तरह खत्म होकर एक मजबूत दोस्ती में बदल चुकी है।

दिलचस्प बात यह रही कि चिराग के भोज में एनडीए का स्ट्राइक रेट जहाँ 100 फीसदी रहा, वहीं महागठबंधन का ‘न आने’ का स्ट्राइक रेट भी 100 फीसदी रहा। राजद, कांग्रेस या वाम दलों का कोई भी बड़ा चेहरा यहाँ नज़र नहीं आया। बीजेपी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि चिराग अब एनडीए के सबसे भरोसेमंद स्तंभों में से एक बन चुके हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि दलित नेता चिराग के इस भोज को कैसे लेंगे। हालांकि जीतनराम मांझी खुद नहीं पहुँचे, लेकिन उन्होंने अपने पुत्र और मंत्री संतोष सुमन को भेजकर एक सकारात्मक संदेश दिया। जेडीयू के महेश्वर हजारी और बीजेपी के लखींद्र पासवान की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की शानदार जीत के बाद दलित वोट बैंक और एनडीए की एकता अटूट है।

तेज प्रताप के भोज ने जहाँ सुर्खियाँ बटोरीं, वहीं चिराग के भोज ने सियासी ‘नतीजे’ दिए। नीतीश कुमार की चिराग से बढ़ती नजदीकियां और एनडीए के दिग्गज नेताओं का एक मंच पर आना यह बताता है कि आने वाले समय में बिहार की कमान किन हाथों में रहने वाली है। चिराग ने साबित कर दिया है कि वे केवल मोदी के हनुमान नहीं, बल्कि बिहार एनडीए के ‘किंगमेकर’ भी हैं।

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