रियल लाइफ हीरो जसवंत सिंह खालरा की कहानी है ‘सतलुज’, रिलीज के दो दिन बाद ही ZEE5 से हटाया गया फिल्म

कई सालों के लंबे इंतजार, कड़े सर्टिफिकेशन विवादों और कानूनी मुश्किलों को झेलने के बाद, दिलजीत दोसांझ की मच-अवेयटेड फिल्म ‘सतलुज’ को हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज किया गया था। लेकिन फैंस की खुशी अभी दो दिन भी नहीं टिक पाई कि इस फिल्म को अचानक प्लेटफॉर्म से पूरी तरह हटा दिया गया है।

जिस फिल्म ‘सतलुज’ को पहले ‘पंजाब ’95’ के नाम से जाना जा रहा था, उसका अचानक इस तरह गायब होना फैंस को हैरान कर रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिलजीत दोसांझ की यह फिल्म आखिर किस रियल लाइफ हीरो की कहानी पर बेस्ड है? हम बात कर रहे हैं पंजाब के मशहूर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की, जिन्होंने पंजाब के उग्रवाद दौर में कुछ ऐसे कड़वे सच दुनिया के सामने रखे थे, जिसने इतिहास हिला दिया था।

जसवंत सिंह खालरा पंजाब के एक बेहद निडर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट थे। अमृतसर जिले के खालरा गांव में साल 1952 में जन्मे जसवंत सिंह पहले एक साधारण बैंक कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, ऑपरेशन ब्लू स्टार, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 के सिख-विरोधी दंगों के काले दौर का उनके दिलो-दिमाग पर बेहद गहरा असर पड़ा और उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ हक की आवाज बुलंद करने का फैसला किया।

90 के दशक में पंजाब के कई सिख परिवारों का दावा था कि उग्रवाद के शक में पंजाब पुलिस ने उनके रिश्तेदारों को उठाया और वे गायब हो गए। जब आस-पास के लोग लगातार लापता होने लगे, तो जसवंत सिंह खालरा ने खुद सबूत इकट्ठा करने की ठानी। अपनी इन्वेस्टिगेशन के दौरान उन्हें अमृतसर नगर निगम के कुछ ऐसे रिकॉर्ड्स मिले, जिन्होंने सबको चौंका दिया। इन रिकॉर्ड्स में हजारों ऐसे लापता लोगों के नाम, उम्र और पते दर्ज थे, जिन्हें कथित तौर पर मार दिया गया था और उनके परिवारों को बताए बिना गुपचुप तरीके से उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। खालरा के इस बड़े खुलासे ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था।

दूसरों को इंसाफ दिलाने की इस खतरनाक जंग में साल 1995 में जसवंत सिंह खालरा खुद अचानक लापता हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आखिरी बार उन्हें अपने घर के बाहर कार धोते हुए देखा गया था, जिसके बाद उनका अपहरण कर लिया गया। अगले ही साल सीबीआई जांच में यह सबूत मिले कि उन्हें तरनतारन के एक पुलिस स्टेशन में अवैध हिरासत में रखा गया था। सीबीआई ने पंजाब पुलिस के 9 अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की सिफारिश की।

एक लंबे और थका देने वाले कानूनी संघर्ष के बाद, 16 अक्टूबर 2007 को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने पूर्व सब-इंस्पेक्टर सतनाम सिंह, सुरिंदर पाल सिंह, जसबीर सिंह और पूर्व हेड कॉन्स्टेबल पृथ्वीपाल सिंह सहित चार आरोपियों की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया। आज उनके इस संघर्ष को उनकी पत्नी परमजीत कौर खालरा और उनके दोनों बच्चे आगे बढ़ा रहे हैं।

जसवंत सिंह खालरा की इसी हिला देने वाली रियल लाइफ स्टोरी को डायरेक्टर हनी त्रेहान ने फिल्म ‘सतलुज’ में उतारा है, जिसमें दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह और सुविंदर विक्की जैसे कलाकार हैं। तीन साल तक सेंसरशिप की लंबी लड़ाई के बाद जब फिल्म आखिरकार जी5 पर आई, तो दर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। लेकिन महज दो दिन बाद फिल्म के अचानक डिलीट होने से सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा और निराशा फूट पड़ी है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 ने सोशल मीडिया पर एक ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी कर फिल्म हटाने की पुष्टि की है। प्लेटफॉर्म ने दर्शकों के शानदार रिस्पॉन्स के लिए शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वे फिल्म के क्रिएटिव विज़न और डायरेक्टर के साथ खड़े हैं। बयान में साफ किया गया कि भारतीय दर्शकों के लिए ‘सतलुज’ को जल्द से जल्द वापस प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम करने के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

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