अंगदान को समर्पित दुनिया का पहला फिल्म फेस्टिवल! 26 फरवरी से दिल्ली में ‘वरदान 2026’ का आगाज़, सीएम रेखा गुप्ता करेंगी उद्घाटन

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनने जा रही है, जो विश्व में पहली बार हो रहा है। 26 और 27 फरवरी 2026 को गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी में आयोजित होने जा रहा है— ‘वरदान इंटरनेश्नल फिल्म फेस्टिवल’। यह कोई साधारण फिल्म फेस्टिवल नहीं है, बल्कि यह सिनेमा के माध्यम से मानवता की उस सेवा को नमन है जिसे हम ‘अंगदान’ और ‘देहदान’ कहते हैं। दधीचि देहदान समिति और संप्रेषण मल्टीमीडिया के इस साझा प्रयास ने आज पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

27 साल पहले आलोक कुमार की दूरदर्शी सोच ने ‘दधीचि देहदान समिति’ को जन्म दिया। पिछले 13 वर्षों का आंकड़ा ही इस समिति की सफलता की कहानी बयां करता है— 1250 से अधिक अंगदान और 500 से अधिक देहदान। वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के नेतृत्व में आज देश की 45 संस्थाएं एकजुट होकर इस मिशन को आगे बढ़ा रही हैं। गर्व की बात है कि इस समिति से निकले सदस्य आज देश सेवा के सर्वोच्च पदों पर हैं, चाहे वो दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हों या केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा।

26 फरवरी की सुबह 11 बजे दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इस वरदान इंटरनेश्नल फिल्म फेस्टिवल का विधिवत शुभारंभ करेंगी। मंच पर संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी इस आयोजन की गंभीरता को दर्शाती है। समारोह के विशिष्ट अतिथि होंगे राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज जोशी, जो सिनेमा और समाज के बीच के सेतु पर अपनी बात रखेंगे। फेस्टिवल के निदेशक अतुल गंगवार के अनुसार, यह मंच केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए बनाया गया है।

फेस्टिवल के दौरान दो दिनों में देश-विदेश से आई 70 से अधिक चुनिंदा फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। ये फिल्में अंगदान की महत्ता, परिवार के संघर्ष और पुनर्जन्म की प्रेरक कहानियों को पर्दे पर उतारेंगी। लेकिन ‘वरदान’ सिर्फ स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं है।

  • एक्टिंग की बारीकियां: 26 फरवरी, दोपहर 2 बजे मनोज जोशी उन बारीकियों को साझा करेंगे जो एक साधारण कहानी को संवेदी सिनेमा में बदल देती हैं।
  • सिनेमा और सरोकार: 27 फरवरी को प्रख्यात समीक्षक और पत्रकार अनंत विजय बताएंगे कि कैसे सही विषय चयन समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके अलावा, युवा पीढ़ी और आलोक जी के बीच होने वाला संवाद सत्र अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का एक सुनहरा अवसर होगा।

27 फरवरी की शाम पुरस्कारों के नाम होगी। सर्वश्रेष्ठ फिल्मों के विजेताओं को न केवल सम्मान मिलेगा, बल्कि लाखों रुपये की पुरस्कार राशि और प्रमाणपत्र देकर उनके जज्बे को सराहा जाएगा। यह फेस्टिवल दुनिया को यह बताने की कोशिश है कि हमारी देह नश्वर हो सकती है, लेकिन हमारे दान किए हुए अंग किसी और की दुनिया रोशन कर सकते हैं।

वरदान अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल 2026—सिनेमा और संवेदना का एक ऐसा ऐतिहासिक संगम है जिसे हर जागरूक नागरिक को देखना चाहिए। यह महोत्सव हमें सिखाता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का ‘वरदान’ हो सकती है। आप भी इस महाकुंभ का हिस्सा बनें और मानवता की इस महान परंपरा को आगे बढ़ाएं।

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