पटना में चिराग पासवान के पोस्टरों ने छेड़ी नई बहस, मुख्यमंत्री बनाने की उठी मांग
पटना: बिहार की राजनीति इस वक्त एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहाँ से हर रास्ता एक नए सस्पेंस की ओर जाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने सूबे की सियासत में वो हलचल पैदा कर दी है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। पटना में कयासों का बाजार गर्म है—कोई सम्राट चौधरी का नाम ले रहा है, तो कोई दिल्ली के किसी बड़े चेहरे की चर्चा कर रहा है। लेकिन, पिछले कुछ घंटों में पटना की सड़कों की तस्वीर बिल्कुल बदल गई है। रातों-रात लगे कुछ पोस्टरों ने एनडीए के भीतर एक नई जंग छेड़ दी है।
पटना की सड़कों पर आज सवेरे जब लोगों की नज़रें उठीं, तो वहां लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान के पोस्टरों ने सबको चौंका दिया। शहर में चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाले पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। इन पोस्टरों पर लिखे नारे सीधे तौर पर चुनौती दे रहे हैं। नारा है— ‘ना दंगा हो ना फसाद हो, बिहार का सीएम सिर्फ चिराग हो।‘ समर्थक दावा कर रहे हैं कि बिहार में अब ‘स्वर्ण काल’ लाने के लिए एक युवा चेहरे की ज़रूरत है। ये पोस्टर सिर्फ मांग नहीं, बल्कि एनडीए के सहयोगियों को एक कड़ा संदेश भी दे रहे हैं कि चिराग अब सिर्फ ‘हनुमान’ बनकर नहीं रहना चाहते।
चिराग की इस दावेदारी के पीछे हालिया चुनाव के वो आंकड़े हैं, जिन्होंने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है। 2025 के विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने एनडीए के तहत 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 पर शानदार जीत दर्ज की। इसी स्ट्राइक रेट ने चिराग को किंगमेकर की भूमिका में खड़ा कर दिया है। पोस्टरों में साफ लिखा है— ‘मोदी जी का मिला अपने हनुमान को आशीर्वाद, चिराग होंगे बिहार के नए सरताज।‘ चिराग के समर्थक मान रहे हैं कि पासवान वोट बैंक और युवाओं की पसंद होने के कारण चिराग ही नीतीश कुमार का सबसे सटीक विकल्प हैं।
चिराग पासवान की ये पोस्टर वाली दावेदारी ऐसे वक्त में आई है जब बीजेपी की ओर से सम्राट चौधरी का नाम सीएम पद की रेस में सबसे आगे बताया जा रहा था। ऐसे में चिराग खेमे की ये सक्रियता एनडीए के भीतर एक ‘पावर टसल’ शुरू कर सकती है। वर्तमान में केंद्र में मंत्री चिराग पासवान ने हमेशा से बिहार की सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा जताई है। अब जब नीतीश बाबू दिल्ली की ओर रुख कर रहे हैं, तो चिराग के समर्थकों ने अपनी मांग को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है। सवाल ये है कि क्या बीजेपी अपने इस ‘हनुमान’ की मुराद पूरी करेगी या फिर सत्ता के नए समीकरण कुछ और ही गुल खिलाएंगे?
पटना की सड़कों पर लगे ये पोस्टर अब बिहार की सत्ता के दावों का नया आधार बन गए हैं। सम्राट चौधरी या चिराग पासवान—इस सस्पेंस से पर्दा तो एनडीए विधायक दल की बैठक में ही उठेगा, लेकिन चिराग ने अपनी दावेदारी पेश कर खेल को और भी दिलचस्प बना दिया है।
