भक्तिमय हुई सीटू सोसायटी, गणपति विसर्जन में लगभग 200 लोग शामिल हुए
दिल्ली: 14 सितंबर से शुरू हुई गणेश उत्सव की धूम पूरी दिल्ली के कोने-कोने में है। गणपति बप्पा मोरिया के जयकारों के साथ महाराष्ट्र का पारंपरिक उत्सव अब केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा है। देश के कोने-कोने में गणपति स्थापना का उत्सव लोगों को आपस में जोड़ रहा है। गणपति स्थापना का उत्सव अब साकेत, द्वारका, विकासपुरी, जनकपुरी, उत्तम नगर ,रोहिणी ,पीतमपुरा, केशव पुरम, अशोक विहार यहां तक की पूरी दिल्ली की सोसायटी और इलाकों में भी पूरी तरह से रच गया है।
सीटू सोसायटी के निवासियों ने भी 14 सितंबर को गणपति चतुर्थी के विशेष दिन गणपति स्थापना की और सोसाइटी के सेंटर पार्क में उनका सिंहासन और पंडाल लगाया गया जहां सुबह पूजा अर्चना भोग, दोपहर को भोग और शाम को महा आरती भजन कीर्तन कार्यक्रम किए गए। प्रतिदिन तीन समय के भोग के साथ प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी रही। प्रतिदिन रात्रि के समय में महा आरती के साथ भंडारे की भी व्यवस्था थी जिसमें प्रतिदिन श्रद्धालुओं को प्रसाद भोजन भंडारा खिलाया गया । प्रतिदिन सोसाइटी के अधिकतर लोग इस आयोजन में शामिल हुए।
50 वर्षीय सीटू सोसाइटी में यह महा उत्सव पहली बार हुआ था। सभी रेजिडेंट्स दिल खोलकर इस कार्यक्रम में शामिल हुए, पूजा अर्चना की। महिलाओं का जोश देखते ही बनता था। छोटे बच्चे भी लाइनों में लगकर प्रतिदिन आरती के समय में पार्क में उपस्थित रहे और यह एक ऐसा सांस्कृतिक उत्सव था जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी रही। आज रविवार को सातवें दिन गणपति विसर्जन के कार्यक्रम में लगभग 300 लोगों ने हिस्सेदारी दिखाई।

ये गणपति इको फ्रेंडली थे जिससे कि पर्यावरण पर भी कोई नुकसान ना हो। यमुना और प्राकृतिक जलाशयों को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने भी सख्त कदम उठाए हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति डीपीसीसी के दिशा निर्देशों कृत्रिम तालाब तैयार किए गए हैं ।प्राकृतिक जलाशयों में मूर्ति पूजा सामग्री, फूल तेल आदि डालने की सख्त पाबंदी है इसीलिए सोसाइटी के सभी युवा वॉलिंटियर्स ने यह निर्णय लिया था कि भगवान जी की मूर्ति इको फ्रेंडली हो ताकि बाद में जिस पानी में उन्हें विसर्जित किया गया है वही पानी पेड़ पौधों में डाल दिया जाए और भगवान का आशीर्वाद पूरी सोसाइटी पर रहे। गणपति स्थापना उत्सव और आज गणपति विसर्जन का रंगारंग उत्सव बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ।
