72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में निदा फाज़ली की यादों को मिला बड़ा सम्मान, ‘मैं निदा’ फिल्म को मिला कला और संस्कृति पुरस्कार
सिनेमा जगत के सबसे प्रतिष्ठित 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का ऐलान हो चुका है। इस बार बेस्ट एक्टर की गद्दी पर एक नहीं बल्कि दो-दो सुपरस्टार्स ने कब्जा किया है। बॉलीवुड के हैंडसम हंक कार्तिक आर्यन और मलयालम सिनेमा के लीजेंड ममूटी को बेस्ट एक्टर चुना गया है। वहीं, अपनी बेहतरीन एक्टिंग का लोहा मनवाने वाली यामी गौतम ने बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब अपने नाम कर लिया है। लेकिन रुकिए, बात सिर्फ इतनी ही नहीं है… इस बार की बेस्ट हिंदी फिल्म और बेस्ट आर्ट-कल्चर फिल्म की कैटगरी में भी जबरदस्त धमाका हुआ है।
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में इस बार बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक का जबरदस्त दबदबा देखने को मिला। ‘चंदू चैंपियन’ में अपनी परफॉर्मेंस से सबका दिल जीतने वाले कार्तिक आर्यन और हॉरर-थ्रिलर ‘ब्रमयुगम’ में अपनी एक्टिंग से रोंगटे खड़े कर देने वाले ममूटी को इस साल का बेस्ट एक्टर घोषित किया गया है। कार्तिक के करियर का यह पहला नेशनल अवॉर्ड है, जिससे उनके फैंस के बीच जश्न का माहौल है।
वहीं, फिल्म ‘आर्टिकल 370’ में अपनी दमदार और सशक्त भूमिका के लिए यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस के अवॉर्ड से नवाजा गया है। इसके साथ ही, बॉलीवुड के टैलेंटेड एक्टर राजकुमार राव की इंस्पायरिंग फिल्म ‘श्रीकांत’ को इस साल की ‘बेस्ट हिंदी फिल्म’ का गौरव मिला है।
लेकिन इन सब बड़े स्टार्स के इतर, अगर बात करें बेस्ट आर्ट और कल्चर फिल्म की, तो इस कैटगरी में एक बेहद ही खूबसूरत और संजीदा फिल्म को सम्मानित किया गया है। इस फिल्म का नाम है ‘मैं निदा’। ‘मैं निदा’ कोई आम कमर्शियल फिल्म नहीं है, बल्कि यह उर्दू और हिंदी के मशहूर व बेहद लोकप्रिय शायर रहे निदा फाज़ली साहब के जीवन और उनकी शायरी पर बनी एक बेमिसाल डॉक्यूमेंट्री है।
आपको याद दिला दें कि अपनी शायरी से लोगों के दिलों को छूने वाले निदा फाज़ली साहब का निधन 8 फरवरी 2016 को 77 साल की उम्र में हो गया था। उनके जाने के बाद भी उनकी यादों को संजोए रखने वाली इस डॉक्यूमेंट्री को निर्माता अतुल गंगवार ने बड़े ही दिल से बनाया है। वहीं, अगर इसके बेहतरीन डायरेक्शन की बात करें, तो अतुल पांडे ने इसे डायरेक्ट किया है, जिन्होंने निदा साहब के जज्बातों को पर्दे पर बखूबी उतारा है। आज इस अवॉर्ड ने साबित कर दिया है कि कला और साहित्य का सम्मान हमेशा सबसे ऊपर रहता है।
