विश्व मांगल्य सभा की उत्तर भारत बैठक, 23 और 24 जुलाई को दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित विश्व युवक केंद्र में होगा मंथन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में इस बार कुछ ऐसा होने जा रहा है जो देश के इतिहास में पहली बार दर्ज होगा। महिलाओं के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक जागरण का अलख जगाने वाली संस्था ‘विश्व मांगल्य सभा’ की उत्तर भारत प्रबोधन बैठक आगामी 23 और 24 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कड़ी होगी— संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का देश की प्रबुद्ध मातृशक्ति के साथ होने वाला सीधा संवाद।

नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित विश्व युवक केंद्र में 23 और 24 जुलाई को वैचारिक मंथन का एक बड़ा केंद्र सजने जा रहा है। विश्व मांगल्य सभा की उत्तर भारत प्रबोधन बैठक में इस बार जम्मू, बारामूला, शोपियां, अनंतनाग, लेह-लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, अवध, मालवा, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा सहित उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 280 महिला प्रतिनिधि हिस्सा लेने पहुंच रही हैं।

मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन की राष्ट्रीय संगठन मंत्री वृषाली जोशी ने बताया कि विश्व मांगल्य सभा पिछले 16 वर्षों से मातृशक्ति के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण का कार्य कर रही है। संगठन का मूल ध्येय वाक्य है— ‘मातु पर देवतम’ यानी ‘मां से बढ़कर कोई देव नहीं’। इस संगठन की स्थापना श्रीनाथ पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित आचार्य स्वामी श्री जीतेंद्रनाथ जी महाराज ने की थी। वर्तमान में संगठन की गतिविधियां देश के 33 प्रांतों में सक्रियता से चल रही हैं।

अक्सर लोगों के मन में इस संगठन को लेकर कई तरह के सवाल रहते हैं, जिनका जवाब प्रेस वार्ता में वृषाली जोशी ने बेहद स्पष्टता के साथ दिया। उन्होंने साफ किया कि विश्व मांगल्य सभा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोई शाखा या उसका आनुषंगिक संगठन नहीं है। लेकिन संगठन के पालक और मार्गदर्शक स्वयं संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत हैं, जो हर साल संगठन के वार्षिक नियोजन के लिए अपना बहुमूल्य समय देते हैं। वृषाली जोशी ने कहा— ‘जिस प्रकार संघ पुरुषों के बीच संगठनात्मक कार्य करता है, उसी प्रकार विश्व मांगल्य सभा महिलाओं के बीच समाज जीवन के विभिन्न विषयों पर कार्य करती है।’ हाल ही में देश के 23 प्रांतों में आयोजित महिला अधिवेशनों में लगभग सात लाख महिलाओं की भारी भागीदारी दर्ज की गई, जिसके बाद संगठन ने आगामी वर्षों के लिए ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय को अपने प्रमुख कार्यक्षेत्र के रूप में चुना है।

इस वर्ष का यह आयोजन बेहद खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संगठन को पूरे चार दिन का समय दिया है। इनमें से दो दिन उत्तर भारत की बैठक दिल्ली में और दो दिन दक्षिण भारत की बैठक हैदराबाद में तय की गई है।

तय कार्यक्रम के अनुसार, 24 जुलाई की सुबह विश्व युवक केंद्र में डॉ. भागवत कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। इसके बाद, उसी दिन शाम 5 बजे जनपथ स्थित अंबेडकर भवन में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहाँ पहली बार संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत देश की लगभग 700 से 800 प्रबुद्ध महिलाओं के साथ ‘मातृत्व विमर्श’ विषय पर सीधा और विस्तृत संवाद करेंगे। इस ढाई घंटे के विशेष सत्र में Q&A Session भी होगी, जहां महिलाएं देश और समाज से जुड़े विषयों पर सीधे सरसंघचालक से सवाल पूछ सकेंगी।

संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित होने वाला यह ‘मातृत्व विमर्श’ न केवल वैचारिक रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी देश को एक नई दिशा देने का काम करेगा। महिलाओं की समाज और राष्ट्र निर्माण में क्या भूमिका होनी चाहिए, डॉ. मोहन भागवत का यह संबोधन यकीनन इस पर नए आयाम स्थापित करेगा।

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