लखनऊ में ‘पृथ्वी 2026’ का शंखनाद, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव के आधिकारिक ब्रोशर का किया लोकार्पण

लखनऊ: भारत अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए-नए कीर्तिमान रच रहा है, और इस बार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बेहद ऐतिहासिक आयोजन की गवाह बनने जा रही है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को ‘पृथ्वी 2026 – भारत का पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव’ की आधिकारिक घोषणा करते हुए इसके ऑफिशियल ब्रोशर का जन भवन में लोकार्पण किया है।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन आने वाले बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान यानी बीएसआईपी (BSIP) द्वारा आयोजित यह महोत्सव न सिर्फ भारत, बल्कि पूरे एशिया का पहला पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव है। यह फेस्टिवल विज्ञान, सिनेमा और आम जनता को एक मंच पर लाकर करोड़ों साल पुराने पृथ्वी के इतिहास, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण जैसे गंभीर विषयों को फिल्मों के जरिए समझाएगा।

लखनऊ के बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित यह भव्य महोत्सव 23 से 25 जुलाई, 2026 तक बीएसआईपी सभागार में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक मौके पर बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश ठक्कर, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिनीता फर्त्याल और महोत्सव के संयोजक डॉ. निमिष कपूर भी मौजूद रहे।

इस महोत्सव का मूल संदेश है— ‘धरती की कहानियों को जीवन्त बनाते हुए, सतत भविष्य के लिए प्रेरणा।’ यह पूरा आयोजन बीएसआईपी की विज्ञान संचार यानी SCoPE पहल के अंतर्गत किया जा रहा है, जिसका मकसद वैज्ञानिकों, फिल्ममेकर्स और युवाओं को एक साथ लाकर समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को और मजबूत करना है।

इस तीन दिवसीय महोत्सव में देशभर के वैज्ञानिकों, स्वतंत्र फिल्मकारों और विश्वविद्यालय के छात्रों की तरफ से शानदार प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। इस फेस्टिवल में फिल्मों को 7 प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है— जिसमें डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म, एनीमेशन फिल्म, साइंस फिक्शन, क्लाइमेट चेंज, जियो-हेरिटेज और स्टूडेंट्स द्वारा बनाई गई स्पेशल कैटेगरी की फिल्में शामिल हैं।

इन सभी फिल्मों का विषय पृथ्वी विज्ञान, भूविज्ञान, वनस्पति विज्ञान और पर्यावरण से जुड़ा होगा। सिर्फ फिल्म स्क्रीनिंग ही नहीं, बल्कि ‘पृथ्वी 2026’ के दौरान ‘राष्ट्रीय संवाद’ का भी आयोजन हो रहा है, जिसमें देश के जाने-माने वैज्ञानिक, मीडिया एक्सपर्ट्स और नीति-निर्माता शामिल होंगे। इस दौरान मास्टरक्लास, पैनल डिस्कशन और आम जनता के साथ सीधा संवाद आयोजित किया जाएगा।

इस महा-आयोजन की सबसे खास बात यह है कि ‘पृथ्वी 2026’ में जिन बेहतरीन फिल्मों का चयन किया जाएगा, उन्हें भविष्य में स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक शैक्षणिक संसाधन यानी एजुकेशनल रिसोर्स के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे आने वाली पीढ़ियों में पर्यावरण और पृथ्वी विज्ञान के प्रति जागरूकता को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

सैकड़ों शोधकर्ताओं, मास कम्युनिकेशन और जियोलॉजी विभाग के छात्रों की सक्रिय भागीदारी के साथ यह महोत्सव विज्ञान संचार के एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है। आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक पहल को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का पूरा सहयोग मिल रहा है।

लखनऊ में होने जा रहा ‘पृथ्वी 2026’ फिल्म महोत्सव वैज्ञानिक ज्ञान को सरल और दिलचस्प बनाकर समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का एक बेहद अनूठा प्रयास है। निश्चित रूप से सिनेमा के माध्यम से पृथ्वी के इतिहास को समझना हर किसी के लिए एक बेहद रोमांचक अनुभव होगा।

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