दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी पर मचा भारी बवाल, ईवी मैन्युफेक्चरिंग सोसायटी ने खोला मोर्चा

नई दिल्ली: दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार जिस ईवी पॉलिसी को अपनी सबसे बड़ी कामयाबी बता रही थी, अब वही पॉलिसी सरकार के लिए गले की हड्डी बनती नजर आ रही है। दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी के खिलाफ ईवी मैन्युफेक्चरिंग सोसायटी यानी ईवीएमएस ने पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है।

राजधानी दिल्ली में ईवीएमएस की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से दिल्ली सरकार की इस नई पॉलिसी का कड़ा विरोध करने का फैसला लिया गया है। संगठनों का आरोप है कि इस नई पॉलिसी में दिल्ली की रीढ़ कहे जाने वाले ई-रिक्शा और ई-कार्ट का जिक्र तक नहीं है, जिससे छोटे निर्माताओं और डीलरों का वजूद ही खतरे में पड़ गया है।

दिल्ली की सड़कों पर लाखों लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने वाले ई-रिक्शा को लेकर इस वक्त सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बैठक में शामिल ईवी फेडरेशन के चेयरमैन अनुज शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि दिल्ली सरकार ने हाल ही में जो ईवी पॉलिसी घोषित की है, उसमें ई-रिक्शा और ई-कार्ट को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। सरकार की इस अनदेखी से ई-रिक्शा चालकों, निर्माताओं और डीलरों के सबसे बड़े संगठन ईवीएमएस में गहरी नाराजगी है।

वहीं, ईवीएमएस के अध्यक्ष अश्विनी सहगल ने सरकार की कथनी और करनी पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकार स्वदेशी और एमएसएमई (MSME) को बढ़ावा देने की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि पॉलिसी लाकर छोटे व्यापारियों के पूरे व्यापार को ही खत्म किया जा रहा है। यही वजह है कि अब ईवीएमएस के पास इस भेदभावपूर्ण पॉलिसी का पुरजोर विरोध करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है।

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर और चौंकाने वाला आरोप लगाया है ईवीएमएस के महासचिव राजीव तुली ने। उनका कहना है कि सरकार जानबूझकर एल-5 जैसी अत्यधिक महंगी गाड़ियों को छोटे व्यापारियों पर थोप रही है, ताकि देश के बड़े और रसूखदार निर्माताओं को सीधा फायदा पहुंचाया जा सके।

राजीव तुली ने तल्ख लहजे में कहा कि— ‘जो काम हमारे छोटे व्यापारी डेढ़ लाख रुपये की गाड़ी में आसानी से कर सकते हैं, वही काम दिल्ली सरकार हमसे जबरदस्ती चार से पांच लाख रुपये की महंगी गाड़ियां खरीदवा कर करवाना चाहती है।’ उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार के इस तानाशाही फैसले से एमएसएमई के तहत आने वाले सैकड़ों छोटे मैन्युफेक्चरर्स का धंधा पूरी तरह से चौपट हो जाएगा और बाजार में सिर्फ और सिर्फ बड़ी कंपनियों का एकाधिकार स्थापित हो जाएगा।

यह नाराजगी अचानक नहीं बढ़ी है, बल्कि इसके पीछे टूटे हुए वादों की एक लंबी फेहरिस्त है। ईवीएमएस के महासचिव ने बताया कि इसी साल 29 अप्रैल को राजधानी के तालकटोरा स्टेडियम में हजारों की संख्या में ई-रिक्शा निर्माता, डीलर और चालक अपनी मांगों को लेकर इकट्ठा हुए थे। उस कार्यक्रम में खुद दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने मंच से आश्वासन दिया था कि ई-रिक्शा और ई-कार्ट को दिल्ली की मुख्य ईवी पॉलिसी में जरूर शामिल किया जाएगा।

इतना ही नहीं, इस पॉलिसी के आने से पहले ईवीएमएस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने खुद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात कर उन्हें अपनी सभी जायज मांगों से अवगत कराया था। लेकिन इन तमाम आश्वासनों के बावजूद, जब पॉलिसी की फाइनल ड्राफ्टिंग आई तो छोटे व्यापारियों की मांगों को कूड़ेदान में डाल दिया गया। गौरतलब यह भी है कि दिल्ली सरकार के पास सड़कों पर बेधड़क चल रहे अवैध ई-रिक्शा को हटाने की कोई ठोस योजना नहीं है, लेकिन वैध काम करने वालों पर नए-नए नियम थोपे जा रहे हैं।

ईवीएमएस के सभी पदाधिकारियों ने अब दिल्ली सरकार को दो टूक चेतावनी दे दी है कि या तो सरकार अपना किया हुआ वादा पूरा करे, अन्यथा आने वाले दिनों में दिल्ली की सड़कों पर एक बड़ा और उग्र आंदोलन देखने को मिलेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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