नई दिल्ली में मातृशक्ति का महासंगम: राष्ट्र सेविका समिति का 15 दिवसीय ‘प्रबोध’ शिक्षा वर्ग भव्यता के साथ हुआ संपन्न
नई दिल्ली: ‘नारी टू नारायणी’— भारत की इस सनातन सोच को जमीन पर उतारने और मातृशक्ति को राष्ट्र निर्माण के लिए संगठित करने का एक भव्य नजारा नई दिल्ली के नेहरू नगर में देखने को मिला। मौका था राष्ट्र सेविका समिति उत्तर क्षेत्र के 15 दिवसीय ‘प्रबोध’ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह का। 6 जून, 2026 से शुरू हुए इस विशेष शिविर में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जैसे पांच प्रांतों से आईं बालिकाओं और महिलाओं ने हिस्सा लिया।
इस समापन समारोह में जहां एक तरफ समिति की प्रमुख संचालिका वंदनीय शांताक्का ने समाज और परिवार में महिलाओं के कर्तव्य बोध की अलख जगाई, वहीं दूसरी तरफ शिविर से प्रशिक्षण पाकर निकलीं इन आधुनिक राष्ट्र सेविकाओं ने लाठी, योग और मार्शल आर्ट्स का ऐसा हैरतअंगेज प्रदर्शन किया कि पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
नेहरू नगर के जी.एल.टी. सरस्वती बाल मंदिर में आयोजित इस समापन समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वंदनीय शांताक्का ने परिवार और समाज की मजबूती के लिए महिलाओं की भूमिका को सबसे अहम बताया। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि धर्म आधारित जीवन ही समाज को सही दिशा दे सकता है, जिसका आधार पुरुषार्थ होना चाहिए।
वंदनीय शांताक्का ने छत्रपति शिवाजी महाराज, स्वामी विवेकानंद और बाल गंगाधर तिलक की माताओं का ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि— ‘भारतमांकीमुक्तिऔरराष्ट्रकल्याणकेलिएइनमाताओंनेश्रेष्ठसंतानोंकीचाहकीऔरउनमेंमहानविचारोंकीस्थापनाकी।आजकीमाताकोभीसंकल्पलेकरअपनीसंतानकोसुसंस्कारित, कर्तव्यनिष्ठऔरराष्ट्रकेलिएसमर्पितबनानाहोगा।‘ उन्होंने आगाह किया कि जिस भी परिवार में विघटन होगा, वह समाज अवनति की ओर ही अग्रसर होगा।
इस प्रबोध वर्ग की सबसे खास बात यह रही कि इसमें 14 वर्ष की किशोरियों से लेकर 55 वर्ष तक की महिलाओं ने एक साथ भागीदारी की। 15 दिनों तक एक साथ रहकर इन सेविकाओं ने न सिर्फ सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता सीखी, बल्कि आत्मरक्षा और आत्म स्वाभिमान जैसे गुणों को भी अपने भीतर उतारा।
वर्गाधिकारी निधि शर्मा और दिल्ली प्रांत कार्यवाहिका सुनीता भाटिया ने बताया कि 6 जून को जब ये बहनें यहाँ आईं थीं, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यहाँ उनका शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास एक साथ होगा। समापन के मौके पर जब इन बालिकाओं ने मैदान पर जूडो-कराटे, योग, दंड प्रहार और यष्टी का सुंदर प्रदर्शन किया, तो सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। यह साफ हो गया कि इस शिविर से निकलने के बाद ये युवतियां अपनी रक्षा स्वयं करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और प्रसिद्ध औद्योगिका आरती सहगल ने अपने संबोधन में देश की प्रतिभाशाली महिलाओं के बढ़ते कदमों की सराहना की और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। वहीं विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर श्रुति त्रिपाठी ने भी बहनों को आत्म बल बढ़ाने का संदेश दिया। आपको बता दें कि राष्ट्र सेविका समिति महिलाओं के बीच यह कार्य पिछले 90 वर्षों से लगातार कर रही है।
निधि शर्मा द्वारा प्रस्तुत वर्ग विवरण के अनुसार, वर्तमान में राष्ट्र सेविका समिति का नेटवर्क पूरे देश में मजबूती से फैल चुका है। आज पूरे देश भर में 4 लाख से अधिक सक्रिय सेविकाएं हैं और 4125 शाखाएं निरंतर चल रही हैं। इसके साथ ही 45 पूर्णकालिक प्रचारिकाएं और 100 विस्तारिकाएं देश के कोने-कोने में इस राष्ट्र कार्य को विस्तार देने में जुटी हुई हैं। इस प्रबोध वर्ग के समापन पर उपस्थित हर नागरिक ने माना कि यह आयोजन अध्यात्म, विज्ञान, सेवा और मानव कल्याण का एक ऐतिहासिक संगम था।
