“नीतीश सेवक, मांगें निशांत!” नए साल पर पटना में पोस्टर वॉर, क्या राजनीति में एंट्री करेंगे निशांत कुमार?
पटना: क्या बिहार की राजनीति में अब ‘निशांत युग’ की शुरुआत होने वाली है? साल 2026 के आगाज से पहले पटना की सड़कों पर लगे कुछ पोस्टरों ने बिहार के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। जेडीयू कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में मांग की है—’नीतीश सेवक, मांगें निशांत’। परिवारवाद के धुर विरोधी रहे नीतीश कुमार के सामने अब उन्हीं की पार्टी के नेताओं ने बड़ी मांग रख दी है।
नए साल के जश्न के बीच पटना की सुबह एक नए सियासी सस्पेंस के साथ हुई है। शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे इन पोस्टरों को गौर से देखिए। पोस्टर पर लिखा है—“नव वर्ष की नई सौगात, नीतीश सेवक मांगें निशांत”। जेडीयू के अलग-अलग नेताओं द्वारा लगाए गए इन बैनरों में निशांत कुमार को पार्टी के ‘अगले जेनरेशन का भविष्य’ बताया गया है। शायरी और नारों के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की गई है कि अब निशांत कुमार को पार्टी की विरासत संभालने के लिए राजनीति में लाया जाए।
यह पोस्टर बाजी इसलिए भी अहम है क्योंकि नीतीश कुमार हमेशा से परिवारवादी राजनीति के कड़े विरोधी रहे हैं। वे अक्सर विपक्षी दलों, खासकर लालू परिवार पर इसे लेकर निशाना साधते रहे हैं। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद से जेडीयू के भीतर एक बड़ा खेमा यह मानने लगा है कि पार्टी को एकजुट रखने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए निशांत कुमार ही सबसे बेहतर विकल्प हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि “चाचा जी (नीतीश कुमार) के हाथों में बिहार सुरक्षित है, लेकिन अब निशांत को आगे आना चाहिए।”
निशांत कुमार अब तक खुद को राजनीति से दूर रखते आए हैं। जब भी उनसे सवाल पूछा गया, उन्होंने इसे टाल दिया और हमेशा अपने पिता के विकास कार्यों की तारीफ की। लेकिन जेडीयू में पक रही यह ‘सियासी खिचड़ी’ बता रही है कि पार्टी के भीतर कुछ बड़ा चल रहा है। क्या यह महज कार्यकर्ताओं का उत्साह है या फिर किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा?
बिहार की राजनीति में पोस्टर सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं होते, बल्कि आने वाले बदलाव के संकेत होते हैं। नए साल के इन पोस्टरों ने जेडीयू के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। क्या नीतीश कुमार अपने बेटे को पार्टी की कमान सौंपकर कार्यकर्ताओं की मांग पूरी करेंगे? या फिर परिवारवाद के अपने उसूलों पर अडिग रहेंगे? साल 2026 की शुरुआत बिहार में बेहद दिलचस्प होने वाली है।
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