सिंगर निशा उपाध्याय ने एंकर को मारने के लिए निकाली सैंडल, भद्दे कमेंट्स पर सरेआम सिखाया सबक!

सारण, बिहार: बिहार की भोजपुरी माटी से निकली आवाज़ निशा उपाध्याय आज चर्चा में हैं, लेकिन अपने किसी गीत के लिए नहीं, बल्कि अपने उस गुस्से के लिए जो आत्मसम्मान की रक्षा के लिए फूटा है। सारण के एक प्रोग्राम में जो कुछ हुआ, उसने पूरे भोजपुरी समाज को शर्मिंदा कर दिया है। एक तरफ कलाकार अपनी कला दिखा रहा था, तो दूसरी तरफ माइक थामे एंकर ने फूहड़ता की सारी सीमाएं पार कर दीं। जब एंकर ने सरेआम सिंगर की गरिमा को ‘रेट’ और ‘फीस’ के भद्दे शब्दों में तौला, तो निशा उपाध्याय ने भी उसे अपनी सैंडल की ताकत दिखा दी।

बिहार का सारण जिला… जहाँ एक सांस्कृतिक संध्या अचानक संग्राम में बदल गया। भोजपुरी की चर्चित गायिका निशा उपाध्याय मंच पर मौजूद थीं, तभी एंकर ने कुछ ऐसा कहा कि निशा का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि निशा अपना आपा खो चुकी हैं। उन्होंने पैर से सैंडल निकाली और सीधे एंकर की तरफ अटैकिंग मोड में बढ़ गईं। मंच पर मौजूद लोग और सुरक्षाकर्मी उन्हें रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन निशा के तेवर बता रहे थे कि आज वो किसी भी कीमत पर अपमान सहने के मूड में नहीं थीं।

अब सवाल उठता है कि आखिर एंकर ने ऐसी क्या हिमाकत की? चश्मदीदों का कहना है कि एंकर ने निशा उपाध्याय की परफॉरमेंस की फीस को लेकर बेहद घटिया और अश्लील टिप्पणी की थी। एंकर मंच से चिल्ला-चिल्लाकर सिंगर का ‘रेट’ बताने की कोशिश कर रहा था। एक महिला कलाकार के लिए भरे समाज में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किसी गाली से कम नहीं था। यही वजह थी कि निशा ने अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए सैंडल को ही अपना हथियार बना लिया। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि सरकारें डीजे और शराब पर तो रोक लगाती हैं, लेकिन इन स्टेज शो में होने वाली फूहड़ता और कलाकारों के साथ होने वाले इस गंदे बर्ताव पर मौन क्यों हैं?

इस घटना के बाद इंटरनेट पर दो फाड़ हो गए हैं। एक गुट का कहना है कि कलाकार खुद ऐसी आजादी देते हैं और फेमस होने के बाद उन्हें इज्जत याद आती है। लेकिन बड़ा तबका निशा उपाध्याय के समर्थन में खड़ा है। लोगों ने मांग की है कि ऐसे फूहड़ एंकर्स को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी को टैग किया जा रहा है कि बिहार की लोक संस्कृति को बचाने के लिए अब कड़े कानून की जरूरत है। लोगों का कहना है कि निशा को उन लोगों को भी सबक सिखाना चाहिए था जो उस वक्त एंकर का बचाव कर रहे थे।

आपको बता दें कि निशा उपाध्याय कोई नया नाम नहीं हैं। वो सारण के ही गौर बसंत गांव की रहने वाली हैं और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने लोकगीतों की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल किया है। अपनी गायकी से बिहार और पूरे देश में पहचान बनाने वाली निशा के साथ हुए इस व्यवहार ने पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या वाकई अब वो वक्त आ गया है कि अश्लीलता और फूहड़ता को जड़ से खत्म करने के लिए कलाकारों को खुद ही कानून हाथ में लेना पड़ेगा?

निशा उपाध्याय का ये सैंडल सिर्फ उस एंकर पर नहीं, बल्कि उस पूरी सोच पर उठा है जो महिला कलाकारों को सिर्फ एक वस्तु समझती है। अगर प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो स्टेज पर होने वाले ये तमाशे भविष्य में और भी हिंसक रूप ले सकते हैं।

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