बिहार विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
पटना: बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र—विधानसभा परिसर—आज छावनी में तब्दील हो गया। शुक्रवार को एक अज्ञात ई-मेल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी, जिसमें विधानसभा को बम से उड़ाने की खौफनाक धमकी दी गई थी। 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले मिली इस धमकी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह किसी की शरारत है या फिर लोकतंत्र के मंदिर पर हमले की कोई बड़ी साजिश? विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने मोर्चा संभालते हुए आपात बैठक की है और चप्पे-चप्पे पर बॉम्ब स्क्वायड की तैनाती कर दी गई है।
शुक्रवार की सुबह विधानसभा सचिवालय के इनबॉक्स में आए एक ई-मेल ने हड़कंप मचा दिया। जैसे ही बम की खबर फैली, पूरे परिसर को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया। सूचना मिलते ही विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की। अध्यक्ष ने प्रभारी सचिव ख्याति सिंह को सख्त निर्देश दिए कि राज्य के मुख्य सचिव और DGP को तुरंत सूचित किया जाए। देखते ही देखते विधानसभा के हर कोने की तलाशी शुरू हो गई। बॉम्ब स्क्वायड और मेटल डिटेक्टरों की मदद से बगीचों से लेकर गलियारों तक की सघन जांच की जा रही है।
यह धमकी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि महज तीन दिन बाद, यानी 16 मार्च को बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई दिग्गज नेता इस दिन विधानसभा परिसर में मौजूद रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव शांतिपूर्ण और बिना किसी डर के संपन्न हों। पुलिस और साइबर सेल अब उस ई-मेल के IP एड्रेस को ट्रेस करने में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि यह किसी असामाजिक तत्व की शरारत भी हो सकती है, लेकिन वे किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरत रहे हैं।
धमकी के बाद अब विधानसभा में प्रवेश के नियमों को और भी सख्त कर दिया गया है। बिना आईडी कार्ड और सघन तलाशी के किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) खुद मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। गौरतलब है कि हाल के दिनों में बिहार के कई सिविल कोर्ट्स को भी इसी तरह की धमकियां मिली थीं, जिससे पुलिस को अंदेशा है कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
लोकतंत्र के इस सबसे बड़े मंदिर पर आंच न आए, इसके लिए पूरी मशीनरी जुटी हुई है। हालांकि शुरुआती जांच में इसे डराने की कोशिश माना जा रहा है, लेकिन 16 मार्च के राज्यसभा चुनाव को देखते हुए सुरक्षा में कोई भी ढील नहीं दी जा सकती। क्या वाकई यह किसी बड़ी साजिश की आहट है या महज एक ‘होक्स’ कॉल? इसका जवाब जांच के बाद ही मिल पाएगा।
